स्मोक न करने वालों को भी फेफड़ों में कैंसर का खतरा, केवल सिगरेट नहीं कई कारण है शामिल

फेफड़ों का कैंसर आमतौर पर धूम्रपान से जोड़ा जाता है, लेकिन हाल ही में एक रिसर्च में चौंकाने वाला सच सामने आया है. दक्षिण कोरिया में किए गए एक बड़े अध्ययन (Multicenter Study) के अनुसार, वे लोग जिन्होंने कभी सिगरेट को हाथ भी नहीं लगाया (Never-smokers), उनमें भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ रहा है. इस खतरे के पीछे केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय कारक भी जिम्मेदार हैं.
धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों का कैंसर, सिगरेट नहीं, ये सामाजिक और स्वास्थ्य कारक हैं असली वजह. जानिए कैसे. यह स्टडी 2016 से 2020 के बीच के 6,000 लोगों पर किया गया, जिसमें 3,000 फेफड़ों के कैंसर (NSCLC) के मरीज थे और 3,000 स्वस्थ लोग. शोध में पाया गया कि फेफड़ों के कैंसर का खतरा केवल तंबाकू तक सीमित नहीं है.
फेफड़ों की पुरानी बीमारी, सबसे बड़ा खतरा
अध्ययन में यह बात प्रमुखता से उभरी कि जिन लोगों को पहले से फेफड़ों की कोई पुरानी बीमारी (जैसे अस्थमा या COPD) रही है, उनमें फेफड़ों का कैंसर होने की संभावना लगभग 3 गुना (2.91 गुना) अधिक होती है. यह शोध इस धारणा को पुख्ता करता है कि श्वसन संबंधी पुरानी समस्याएं कैंसर के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देती हैं.
सामाजिक और आर्थिक स्थिति का प्रभाव
हैरानी की बात यह है कि आपकी शिक्षा और रहने की जगह भी आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है. स्नातक या उससे अधिक शिक्षित लोगों में फेफड़ों के कैंसर का जोखिम 47 प्रतिशत तक कम पाया गया.राजधानी क्षेत्र से बाहर रहने वाले लोगों में कैंसर का खतरा अधिक देखा गया. बेरोजगारी को भी बढ़े हुए जोखिम से जोड़कर देखा गया है.
फैमिली का इतिहास और आनुवंशिकता
अगर परिवार में किसी को पहले से फेफड़ों का कैंसर रहा है, तो धूम्रपान न करने वालों में इसका खतरा 23 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. हालांकि, रिसर्चर ने पाया कि यह पारिवारिक जोखिम हमेशा आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Driver Mutations) से ही जुड़ा हो, यह जरूरी नहीं है.
यह स्टडी साफ करता है कि फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग (Screening) के नियम केवल धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं रहने चाहिए. जोखिम के आकलन के लिए अब मरीज की स्वास्थ्य स्थिति, उसके परिवार का इतिहास और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा.


