सावधान! बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (BPD) और शराब की लत में गहरा संबंध, जानिए क्या कहता है रिसर्च

हाल ही में हुए एक बड़े 'मेटा-एनालिसिस' (Meta-analysis) में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (BPD) से जूझ रहे आधे से अधिक लोग शराब के सेवन से जुड़ी समस्याओं (Alcohol Use Disorders) के शिकार हैं. यह स्टडी मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्क्रीनिंग और एकीकृत उपचार की तत्काल आवश्यकता पर जोर देता है.
BPD और शराब का जोखिम: क्या है संबंध?
बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर एक जटिल मानसिक स्थिति है, जिसकी मुख्य पहचान भावनात्मक अस्थिरता, आवेगी व्यवहार (Impulsivity) और रिश्तों में आने वाली कठिनाइयां हैं. शराब का दुरुपयोग BPD के लक्षणों को और अधिक बिगाड़ देता है. शराब की लत से पीड़ित मरीजों में खुद को नुकसान पहुँचाने का जोखिम बढ़ जाता है. नशे के कारण मरीज इलाज की प्रक्रिया और दवाओं के साथ सही तालमेल नहीं बिठा पाता.
शोध के प्रमुख आंकड़े
15,603 व्यक्तियों पर किए गए इस विस्तृत अध्ययन में मार्च 2024 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. परिणामों ने चिकित्सा जगत को चौंका दिया है. BPD के मरीजों में शराब के विकारों की कुल व्यापकता 55.28% पाई गई. लगभग 44.59% मरीज पूरी तरह शराब पर निर्भर थे. जहां सामान्य पुरुषों में यह आंकड़ा 8.6% और महिलाओं में 1.7% है, वहीं BPD के मरीजों में यह बोझ कई गुना अधिक है.
इलाज की नई दिशा: डुअल डायग्नोसिस (Dual Diagnosis)
एक्सपर्ट का मानना है कि अब समय आ गया है जब डॉक्टरों को 'डुअल डायग्नोसिस' दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. इसका मतलब है कि मरीज के मानसिक स्वास्थ्य (BPD) और उसकी नशे की लत (Alcoholism) का इलाज एक साथ किया जाना चाहिए. BPD के हर मरीज की शराब की लत के लिए नियमित जांच होनी चाहिए. मनोवैज्ञानिक उपचार और नशामुक्ति हस्तक्षेपों को मिलाकर एक प्रभावी उपचार योजना बनानी चाहिए. अगर समस्या की पहचान शुरुआती चरणों में हो जाए, तो सुधार की संभावना काफी बढ़ जाती है.


