तमिलनाडु : सुप्रीम कोर्ट की 8 सप्ताह की डेडलाइन बीतने के बावजूद चेन्नई में आवारा कुत्तों की शिफ्टिंग धीमी, शेल्टर की भारी कमी

चेन्नई: सुप्रीम कोर्ट द्वारा सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए दी गई आठ सप्ताह की समयसीमा समाप्त हुए कई सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) अब तक इस प्रक्रिया को पूरी तरह लागू नहीं कर पाया है। शेल्टर की भारी कमी के कारण कुत्तों की शिफ्टिंग की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने नागरिक निकायों को निर्देश दिया था कि वे सार्वजनिक क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाकर लोगों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करें। इसके बाद दिसंबर में जीसीसी ने वित्तीय सहायता योजना की घोषणा की, जिसके तहत प्रति कुत्ता प्रतिदिन 50 रुपये भोजन खर्च और 20 से अधिक कुत्तों वाले शेल्टर को प्रतिदिन 750 रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया।
इसके बावजूद, अधिकांश एनजीओ स्थान और बुनियादी ढांचे की कमी का हवाला देते हुए आगे आने में संकोच कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अधिकृत शेल्टर पहले ही अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रहे हैं। तमिलनाडु एनिमल वेलफेयर बोर्ड (TNAB) ने आठ स्वीकृत एनजीओ की सूची साझा की है, लेकिन फिलहाल कोई भी अतिरिक्त कुत्तों को रखने की स्थिति में नहीं है। दो संगठनों के साथ बातचीत जारी है, जबकि शहर के बाहरी क्षेत्रों में भी इच्छुक समूहों को स्थान की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
अब तक सीमित कार्रवाई ही हो सकी है। हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट परिसर से 40 आवारा कुत्तों को हटाया गया, जिनमें से 21 को नेम्मेली स्थित एक एनजीओ शेल्टर में भेजा गया और शेष को गोद दे दिया गया। शहरभर में आवारा कुत्तों की संख्या का आकलन करने के लिए प्रस्तावित सर्वेक्षण भी अभी शुरू नहीं हुआ है।
जगह की कमी को दूर करने के लिए जीसीसी ने माधवरम और वेलाचेरी में दो विशेष शेल्टर बनाने हेतु जमीन चिन्हित की है। प्रत्येक शेल्टर में लगभग 250 कुत्तों को रखने की व्यवस्था होगी, जिनमें रेबीज या अन्य बीमारियों से ग्रस्त और आक्रामक व्यवहार वाले कुत्ते भी शामिल होंगे। इन शेल्टरों के निर्माण और संचालन के लिए एनजीओ को टेंडर जारी किए गए हैं और मार्च के अंत तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। (With inputs from IANS)


