नई दिल्ली: अंतरिक्ष में सही तरीके से नींद लेना कई बार बड़ी चुनौती साबित होता है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर अंतरिक्ष यात्रियों को हर 90 मिनट में सूर्योदय और सूर्यास्त दिखाई देता है, जिससे उनकी प्राकृतिक घड़ी या सर्कैडियन रिदम प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप नींद की कमी, थकान और कार्य में गंभीर गलतियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कुछ आसान और प्रभावी उपाय विकसित किए हैं, जिन्हें अंतरिक्ष यात्रियों के लिए फॉलो किया जाता है।

ये उपाय पृथ्वी पर रहने वाले लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो शिफ्ट वर्क करते हैं, जेट लैग से परेशान रहते हैं या सामान्य जीवन में नींद की समस्या से जूझ रहे हैं।

नासा के फ्लाइट सर्जन और वैज्ञानिकों के अनुसार, ये सात उपाय सर्कैडियन रिदम को संतुलित रखने और नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में कारगर साबित हुए हैं। पहला उपाय है सोने और जागने का समय तय करना। नियमित समय पर सोने और जागने से शरीर को बदलाव के लिए तैयार होने का अवसर मिलता है और अनिद्रा तथा थकान कम होती है। इस समय सारिणी में प्रकाश, व्यायाम, आहार और जरूरत पड़ने पर नींद की दवाओं का इस्तेमाल भी शामिल किया जा सकता है।

दूसरा उपाय है नींद से संबंधित शिक्षा और प्रशिक्षण। नींद को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। उदाहरण के लिए, शाम को डिजिटल स्क्रीन की ब्लू लाइट कम करें, सही समय पर व्यायाम करें और संतुलित भोजन का सेवन करें। ये आदतें सर्कैडियन रिदम को बिगड़ने से रोकती हैं और स्वस्थ नींद में मदद करती हैं।

तीसरा, नींद के लिए बेहतर वातावरण बनाना। शांत, अंधेरा और ठंडा कमरा नींद के लिए सबसे उपयुक्त होता है। आईएसएस में इसके लिए निजी सोने के कमरे, आंखों पर मास्क, कान में प्लग और तैरने से रोकने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। पृथ्वी पर भी शोर कम करें, कमरे का तापमान 18–22 डिग्री रखें और आरामदायक बिस्तर चुनें।

चौथा उपाय है रोशनी का सही इस्तेमाल। आईएसएस पर सॉलिड-स्टेट लाइटिंग से दिन-रात का भ्रम पैदा किया जाता है। सुबह तेज रोशनी सतर्कता बढ़ाती है, जबकि शाम को हल्की रोशनी और स्क्रीन टाइम कम करने से नींद आती है।

पाँचवां, ओवर-द-काउंटर दवाओं का इस्तेमाल। डॉक्टर की सलाह से मेलाटोनिन या कैफीन का इस्तेमाल सर्कैडियन रिदम को ठीक करने में मदद करता है। मेलाटोनिन विशेष रूप से असामान्य समय पर नींद लाने में प्रभावी है। छठा उपाय है स्लीप कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी)। यह तकनीक सोने से पहले मन में आने वाले परेशान करने वाले विचारों को दूर करने, रिलैक्सेशन में मदद करने और नींद की स्वच्छता बनाए रखने के लिए उपयोगी है।

सातवां और अंतिम उपाय है जरूरत पड़ने पर दवाइयों का सहारा लेना। यदि अन्य उपाय प्रभावी न हों, तो क्रोनोबायोलॉजिक, हिप्नोटिक या अलर्टनेस बढ़ाने वाली दवाओं का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन केवल डॉक्टर की सलाह के तहत। इन आसान और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपायों को अपनाकर न केवल अंतरिक्ष यात्रियों बल्कि सामान्य लोग भी बेहतर नींद, तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित कर सकते हैं। (With inputs from IANS)

IANSNASACircadian RhythmJet Lag

Topic:

सुकून भरी नींद और स्वस्थ जीवन के लिए नासा के सुझाए सात आसान उपाय अपनाएं।
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.