जब किसी बच्चे को कैंसर होता है, तो यह केवल शरीर को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार और परिवेश को बदल देता है. माता-पिता का समय अस्पताल के चक्करों में कटने लगता है और सामान्य बातचीत में भी डर समा जाता है. लेकिन इस चिकित्सा लड़ाई के साथ-साथ परिवार एक और दर्दनाक अनुभव से गुजरता है.अज्ञानता और अफवाहों से पैदा हुई गलतफहमिया. बचपन के कैंसर से जुड़े मिथक अक्सर डर की वजह से पैदा होते हैं. ये मिथक उन बच्चों को अकेला कर देते हैं जिन्हें उस समय सबसे अधिक साथ की जरूरत होती है.

मिथक1- बचपन का कैंसर संक्रामक है

यह सबसे दुखद गलतफहमी है। कैंसर कोई छूत की बीमारी नहीं है. यह छूने, साथ खेलने, खिलौने साझा करने या साथ खाना खाने से नहीं फैलता. अक्सर इस डर से लोग प्रभावित बच्चों से दूरी बना लेते हैं, जिससे बच्चा खुद को समाज से कटा हुआ महसूस करने लगता है.

मिथक 2: इसके लिए माता-पिता जिम्मेदार हैं

सच: कई माता-पिता अपराधबोध (Guilt) में जीते हैं कि शायद उनके खान-पान या किसी गलती से बच्चे को यह बीमारी हुई. विज्ञान स्पष्ट है. ज्यादातर बचपन के कैंसर कोशिकाओं के विकास के दौरान होने वाले आकस्मिक आनुवंशिक परिवर्तनों (Random Genetic Changes) के कारण होते हैं. इसमें माता-पिता की जीवनशैली का कोई दोष नहीं होता.

मिथक 3: यह हमेशा जानलेवा होता है

सच: आज के दौर में यह धारणा पुरानी हो चुकी है. चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के कारण बच्चों में कैंसर की रिकवरी दर (Survival Rate) में जबरदस्त सुधार हुआ है. कई बच्चे पूरी तरह ठीक होकर सामान्य वयस्क जीवन जी रहे हैं.

मिथक 4: इलाज बीमारी से ज्यादा बुरा है

सच:कीमोथेरेपी और रेडिएशन डरावने लग सकते हैं, लेकिन ये सजा नहीं बल्कि सुरक्षा हैं. आधुनिक तकनीक ने दर्द प्रबंधन और 'सपोर्टिव केयर' को इतना बेहतर बना दिया है कि बच्चों के लिए इलाज अब पहले से कहीं अधिक सहनीय है.

मिथक 5: कैंसर पीड़ित बच्चों को सबसे अलग रखना चाहिए

सच: संक्रमण से बचाव जरूरी है, लेकिन भावनात्मक अलगाव (Isolation) नुकसानदेह है. डॉक्टरों की सलाह पर बच्चे स्कूल जा सकते हैं और दोस्तों से मिल सकते हैं. दोस्तों के साथ बिताया गया समय और सामान्य दिनचर्या उनके ठीक होने की प्रक्रिया (Healing) का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

मिथकों को तोड़ना क्यों है जरूरी?

गलत जानकारी व्यवहार बदल देती है. यह तय करती है कि पड़ोसी, स्कूल और दोस्त आपके साथ कैसा व्यवहार करेंगे. जब हम डर की जगह समझ को चुनते हैं, तो बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है.

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जब किसी बच्चे को कैंसर होता है, तो यह केवल शरीर को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार और परिवेश को बदल देता है.
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Dr Kriti Hegde

Dr Kriti Hegde is a Consultant in Paediatric Haemato-Oncology specializing in childhood cancers, haematology, and transplants. She holds an MD in Paediatrics and advanced fellowships in India and the UK. Her expertise includes complex case management, late effects care, targeted therapies, multidisciplinary coordination, and compassionate, outcome-focused treatment for children everywhere.