पीरियड्स की ऐंठन और तनाव से राहत पाने के लिए जरूरी मैग्नीशियम, महिलाएं डाइट में जरूर करें शामिल

नई दिल्ली– हर महिला अपनी सेहत का ध्यान रखती है, लेकिन अक्सर यह भूल जाती है कि कुछ छोटे-छोटे पोषक तत्व भी स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनमें से एक है मैग्नीशियम, जो मांसपेशियों और हड्डियों के लिए बेहद आवश्यक है। पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अक्सर ऐंठन और दर्द की शिकायत होती है, और मैग्नीशियम इन समस्याओं को कम करने में मदद करता है।
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वात और पित्त के असंतुलन के कारण भी दर्द और ऐंठन बढ़ सकती है, और मैग्नीशियम इन तत्वों को संतुलित रखने में सहायक है। इसलिए पीरियड्स के समय मैग्नीशियम युक्त आहार लेने से महिलाओं को दर्द में राहत मिलती है।
हड्डियों की मजबूती के लिए सिर्फ कैल्शियम ही नहीं, बल्कि मैग्नीशियम भी जरूरी है। आयुर्वेद इसे धातु पोषक तत्व मानता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। मैग्नीशियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। कैल्शियम और मैग्नीशियम का संतुलन शरीर के लिए आवश्यक है और इसे संतुलित मात्रा में लेने से हड्डियों की लंबी अवधि तक सेहत बनी रहती है।
मैग्नीशियम का असर महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य और नींद पर भी पड़ता है। तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी समस्याओं में इसकी कमी साफ दिखाई देती है। रिसर्च बताती है कि पर्याप्त मैग्नीशियम लेने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है और तनाव कम होता है। आयुर्वेद इसे मस्तिष्क और नसों का पोषक मानता है, जो सोचने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाता है।
सिर में तेज दर्द यानी माइग्रेन भी महिलाओं में अक्सर मैग्नीशियम की कमी से जुड़ा होता है। शोध बताता है कि नियमित मैग्नीशियम युक्त आहार लेने से माइग्रेन अटैक की संभावना काफी कम हो जाती है। इसके अलावा, हृदय स्वास्थ्य के लिए भी यह पोषक तत्व महत्वपूर्ण है। नियमित सेवन से हृदय की गति संतुलित रहती है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों के अनुसार, मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा के लिए हरी सब्जियां, अंकुरित दाने, मेवे, दलहन और साबुत अनाज को आहार में शामिल करना चाहिए। (With inputs from IANS)


