बदलते मौसम में इम्युनिटी बूस्ट करने का योगिक मंत्र: सूर्यभेदन प्राणायाम

नई दिल्ली: योगशास्त्र में प्राणायाम को जीवन ऊर्जा को नियंत्रित और विस्तारित करने का प्रभावी माध्यम माना गया है। यह न केवल श्वास-प्रश्वास को संतुलित करता है, बल्कि नाड़ियों के समन्वय में भी अहम भूमिका निभाता है। इन्हीं प्राणायामों में सूर्यभेदन प्राणायाम शामिल है, जो शरीर के आंतरिक तापमान को तेजी से बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
‘सूर्य’ शब्द ऊर्जा और गर्मी के प्रतीक सूर्य को दर्शाता है, जबकि ‘भेदन’ का अर्थ जाग्रत करना या सक्रिय करना है। इस प्राणायाम में दाहिनी नासिका, जिसे पिंगला या सूर्य नाड़ी कहा जाता है, से श्वास ली जाती है। इससे शरीर में ऊष्मा, ऊर्जा और जीवन शक्ति का संचार होता है। हठयोग प्रदीपिका सहित प्राचीन योग ग्रंथों में सूर्यभेदन को आठ प्रमुख कुंभकों में से एक बताया गया है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, सूर्यभेदन प्राणायाम शरीर को गर्म रखने, रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और ठंड से होने वाली जकड़न को दूर करने में प्रभावी है। इस अभ्यास में दाहिनी नासिका से सांस लेकर बाईं नासिका से छोड़ी जाती है। विशेष रूप से सर्दियों में इसका अभ्यास लाभकारी माना जाता है, हालांकि उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इसे करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
सूर्यभेदन प्राणायाम करने की विधि सरल है। इसके लिए सुखासन, पद्मासन या किसी आरामदायक मुद्रा में बैठें। बाईं नासिका को बंद कर दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस लें। सांस पूरी भरने के बाद दोनों नासिकाएं बंद कर कुछ क्षण रोकें, फिर बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इसे एक चक्र माना जाता है। रोज सुबह खाली पेट 10 से 15 चक्र करने की सलाह दी जाती है।
योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास सर्दी-जुकाम, नाक बंद होने जैसी समस्याओं में राहत देता है।
आयुर्वेद के अनुसार, सूर्यभेदन प्राणायाम पिंगला नाड़ी को सक्रिय कर शरीर में आंतरिक ऊष्मा यानी अग्नि को प्रबल करता है। यह पाचन को बेहतर बनाता है, प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाता है और मानसिक एकाग्रता के साथ जीवन ऊर्जा को जाग्रत करता है। कफ दोष से जुड़ी समस्याओं में यह विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। साथ ही, यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाकर शरीर को अधिक ऊर्जावान और सक्रिय बनाता है। (With inputs from IANS)


