नई दिल्ली: तेज़ रफ्तार जीवनशैली का सबसे अधिक असर पाचन तंत्र पर पड़ा है। अनियमित समय पर भोजन, तली-भुनी चीजों का अधिक सेवन, कम फाइबर और बढ़ता तनाव गैस, अपच, कब्ज और पेट भारी रहने जैसी समस्याओं को आम बना रहे हैं। ऐसे में रसोई में मौजूद हरा चना एक असरदार प्राकृतिक उपाय बन सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार हरा चना त्रिदोष संतुलन में सहायक होता है और विशेष रूप से पित्त व कफ को नियंत्रित करता है। यह पेट में अतिरिक्त नमी और चिपचिपाहट कम कर आंतों की क्रिया सुधारता है, जिससे पाचन तंत्र साफ रहता है। साथ ही यह धीरे-धीरे अग्नि यानी पाचन शक्ति को मजबूत करता है, जिससे भोजन सही तरह से पचता है और शरीर को पोषण बेहतर मिलता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से हरा चना डाइटरी फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत है। इसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर होते हैं, जो भोजन को आंतों में आगे बढ़ाने, मल को नरम रखने और कब्ज रोकने में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से गैस और सूजन भी कम हो सकती है। यह धीरे पचता है, इसलिए लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है और बार-बार भूख नहीं लगती, जिससे ओवरईटिंग कम होती है और वजन नियंत्रण में मदद मिलती है।

हरा चना प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होने के कारण इंसुलिन प्रतिक्रिया को संतुलित करता है और ब्लड शुगर स्थिर रखने में सहायक होता है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो आंतों की परत को मजबूत करते हैं, सूजन घटाते हैं और एसिडिटी या जलन में राहत देते हैं।

पाचन के अलावा हरा चना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसका प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूती देता है, आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है और एनीमिया से बचाव करता है। फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित कर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत करते हैं।

इसे सब्जी, सूप, सलाद, पुलाव या हल्के नाश्ते के रूप में आसानी से रोज़मर्रा के आहार में शामिल किया जा सकता है, जिससे संतुलित आहार और बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखना आसान हो जाता है। (With inputs from IANS)

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हरा चना आंतों की सफाई कर पाचन सुधारता है और पेट संबंधी समस्याओं को कम करता है।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.