मुंबई: डिजिटल दौर में शारीरिक गतिविधि की कमी का सबसे पहला असर हड्डियों और मांसपेशियों पर दिखाई देता है। शुरुआत में शरीर में हल्की थकान महसूस होती है, लेकिन धीरे-धीरे जोड़ों में दर्द, पीठ में खिंचाव और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। उम्र बढ़ने के साथ ये परेशानियां और गंभीर हो जाती हैं।

आयुर्वेद इसे वात दोष की गड़बड़ी से जोड़ता है, जबकि आधुनिक विज्ञान इसे शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी का परिणाम मानता है। ऐसे में तिल एक प्राकृतिक और आसान समाधान के रूप में सामने आता है।

चाहे काले तिल हों या सफेद, दोनों ही सेहत के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। आयुर्वेद में तिल को बल्य यानी शरीर को ताकत देने वाला और स्निग्ध यानी पोषण देने वाला बताया गया है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, तिल में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे अहम मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तीनों मिलकर हड्डियों को मजबूती देते हैं और मांसपेशियों को सहारा प्रदान करते हैं।

हड्डियों की मजबूती के लिए केवल कैल्शियम ही पर्याप्त नहीं होता। मैग्नीशियम कैल्शियम के सही अवशोषण में मदद करता है, जबकि फॉस्फोरस हड्डियों की संरचना को संतुलित बनाए रखता है। तिल में ये सभी तत्व प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं, जिससे इनका असर धीरे-धीरे लेकिन लंबे समय तक बना रहता है। इसी कारण आयुर्वेद में तिल को रोज़ाना के आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है।

उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का कमजोर होना एक आम समस्या है, खासतौर पर महिलाओं में। विज्ञान इसे ऑस्टियोपोरोसिस के नाम से जानता है। आयुर्वेद का मानना है कि समय रहते शरीर को सही पोषण मिल जाए, तो इस स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता है। रोजाना थोड़ी मात्रा में तिल का सेवन करने से हड्डियों को अंदरूनी मजबूती मिलती है और उनके कमजोर होने या टूटने का खतरा कम हो जाता है।

तिल सिर्फ हड्डियों को ही नहीं, बल्कि जोड़ों के दर्द से राहत देने में भी सहायक होता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। घुटनों में दर्द, गर्दन की अकड़न या गठिया जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए तिल एक आसान घरेलू उपाय साबित हो सकता है। सर्दियों के मौसम में इसका प्रभाव और भी बेहतर माना जाता है, क्योंकि तिल शरीर को अंदर से गर्माहट भी प्रदान करता है।

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ और स्वास्थ्य जानकार दोनों ही तिल का सेवन संतुलित मात्रा में करने की सलाह देते हैं। रोजाना एक से दो चम्मच तिल पर्याप्त होते हैं। इसे हल्का भूनकर खाया जा सकता है, सब्जियों या सलाद में मिलाया जा सकता है या फिर गुड़ के साथ लड्डू बनाकर भी सेवन किया जा सकता है। पारंपरिक तिल-गुड़ के लड्डू स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी माने जाते हैं। (With inputs from IANS)

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रोज़ाना एक चम्मच तिल का सेवन करने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है और शरीर को अंदर से मजबूती मिलती है।
Stuti Tiwari
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Stuti Tiwari joined Medical Dialogues in 2025 as a Hindi Content Writing Intern. She is currently pursuing a Bachelor’s degree in Journalism from the University of Delhi. With a strong interest in health journalism, digital media, and storytelling, Stuti focuses on writing, editing, and curating Hindi health content. She works on producing informative, engaging, and accurate articles to make healthcare news and updates more understandable and relatable for Hindi-speaking audiences.