30 पार करते ही बढ़ रही भूलने की आदत, इन आदतों से दिमाग रहेगा तेज

नई दिल्ली: आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में 30 की उम्र पार करने के बाद लोग अक्सर थकान, भूलने की आदत, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी को आम मान लेते हैं। काम का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां, मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के लंबे समय तक उपयोग और अनियमित दिनचर्या धीरे-धीरे दिमाग और शरीर पर असर डालने लगती है।
आयुर्वेद इसे प्रज्ञापराध कहता है, यानी जब इंसान अपनी बुद्धि, शरीर और मन की जरूरतों की अनदेखी करता है। विज्ञान भी मानता है कि 30 के बाद गलत जीवनशैली, नींद की कमी और लगातार तनाव दिमाग की कोशिकाओं पर स्पष्ट प्रभाव डालते हैं।
नींद दिमाग की सेहत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद में इसे भूतधात्री कहा गया है, क्योंकि गहरी नींद में दिमाग अपने अंदर जमा टॉक्सिन्स को साफ करता है। नींद पूरी न होने पर याददाश्त कमजोर हो जाती है, मूड अस्थिर होता है और ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। रोज़ एक ही समय पर सोने और जागने की आदत हार्मोन संतुलन बनाए रखती है और दिमाग को सुरक्षा और शांति का अहसास कराती है।
शरीर और दिमाग हमेशा जुड़े रहते हैं। हल्की-फुल्की रोज़ाना की गतिविधियां जैसे टहलना, योग या स्ट्रेचिंग दिमाग में खून का प्रवाह बढ़ाती हैं, नई नसों को मजबूत बनाती हैं और दिमाग को युवा बनाए रखती हैं। इससे मानसिक तनाव कम होता है और शरीर को भी सुरक्षित महसूस होता है।
खानपान का दिमाग पर सीधा असर होता है। अत्यधिक मीठा, तला-भुना और पैकेट वाला खाना दिमाग में सूजन बढ़ाता है, जिसे विज्ञान ब्रेन इंफ्लेमेशन कहता है। इसके बजाय प्रोटीन, अच्छे फैट, साबुत अनाज, ताजी सब्जियां और पर्याप्त पानी दिमाग को पोषण, शक्ति और स्थिरता देते हैं। घी, मेवे और पर्याप्त जल भी दिमाग की कार्यक्षमता के लिए लाभकारी हैं।
दिमाग को लगातार नई चुनौतियां देना भी जरूरी है। पढ़ाई, लिखाई, नई भाषा सीखना या कोई नया हुनर सीखना दिमाग की नसों में नए रास्ते बनाता है और सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाता है। केवल मोबाइल और स्क्रीन पर निर्भर रहने से दिमाग सुस्त हो जाता है और उम्र बढ़ने पर भूलने की आदत तेज हो जाती है।
तनाव से निपटना दिमाग की सेहत के लिए अनिवार्य है। लगातार तनाव में रहने से दिमाग हमेशा खतरे की स्थिति में रहता है, जिससे नींद, याददाश्त और मूड प्रभावित होते हैं। गहरी सांस लेना, प्रकृति के बीच समय बिताना, ध्यान करना और अपनी भावनाओं को समझना दिमाग को आराम देता है। तनाव को पूरी तरह मिटाने की बजाय धीरे-धीरे उसे पचाना दिमाग की वास्तविक सेहत को बनाए रखने का तरीका है।
इस प्रकार, 30 की उम्र के बाद दिमाग और शरीर की सेहत बनाए रखने के लिए नींद, खानपान, हल्की एक्सरसाइज, मानसिक चुनौतियां और तनाव प्रबंधन सभी महत्वपूर्ण आदतें हैं। नियमित अभ्यास से दिमाग तेज, स्थिर और संतुलित रहता है। (With inputs from IANS)


