कैंसर से बचाव के 7 अचूक उपाय, अपनी जीवनशैली में करें ये बदलाव

कैंसर के खतरे को कम करने के लिए अक्सर कई तरह की सलाह दी जाती है, जो कभी-कभी भ्रमित करने वाली हो सकती है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हमारी रोजमर्रा की आदतें और जीवनशैली के चुनाव कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं. आइए जानते हैं कैंसर से बचाव के 7 प्रमुख तरीके.
तंबाकू का सेवन पूरी तरह छोड़ें
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन फेफड़ों, मुंह, गले, अग्न्याशय (Pancreas) और किडनी समेत कई तरह के कैंसर का कारण बनता है. इतना ही नहीं, 'सेकेंडहैंड स्मोक' (दूसरों के धुएं के संपर्क में आना) भी उतना ही खतरनाक है.अगर आप तंबाकू छोड़ना चाहते हैं, तो डॉक्टरी मदद जरूर लें.
स्वस्थ और संतुलित आहार लें
पौधों पर आधारित भोजन-अपनी थाली में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फलियों को प्रमुखता दें.
शराब से दूरी-शराब का सेवन स्तन, लिवर और कोलन कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है.
मेडिटेरेनियन डाइट-जैतून का तेल (Olive oil), नट्स और मछली पर आधारित यह आहार स्तन कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक पाया गया है।
वजन नियंत्रित रखें और सक्रिय रहें
मोटापा स्तन, लिवर और कोलन कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है. फिट रहने के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम एरोबिक गतिविधि (जैसे तेज चलना) या 75 मिनट की कठिन कसरत का लक्ष्य रखें.
धूप से अपनी त्वचा का बचाव करें
- सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच कड़ी धूप से बचें.
- बाहर निकलते समय सनग्लासेस, चौड़ी टोपी और पूरी बाजू के कपड़े पहनें.
- कम से कम 30 SPF वाला सनस्क्रीन लगाएं और इसे हर दो घंटे में दोहराएं.
टीकाकरण (Vaccination) जरूर कराएं
कुछ वायरल संक्रमण कैंसर का कारण बन सकते हैं। इनसे बचने के लिए टीके लगवाएं. हेपेटाइटिस B, यह लिवर कैंसर के खतरे को कम करता है. ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV)- यह सर्वाइकल और अन्य जननांग कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है. सुरक्षित यौन संबंध- एक से अधिक यौन साथी और असुरक्षित संबंध HIV या HPV जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं. नशीली दवाओं के लिए साझा सुइयों का उपयोग हेपेटाइटिस B, C और HIV फैला सकता है, जिससे लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
नियमित चिकित्सा जांच और स्क्रीनिंग
समय-समय पर स्वयं की जांच (Self-exam) करें और त्वचा, कोलन, गर्भाशय ग्रीवा और स्तन कैंसर के लिए नियमित स्क्रीनिंगकराएं. कैंसर का जल्द पता चलने पर इलाज की सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है.


