डायबिटीज में आलू या शकरकंद? रोज की थाली में कौन-सा विकल्प ज्यादा सुरक्षित है?

नई दिल्ली: भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ती समस्या बन चुकी है। लाखों लोग या तो इससे पीड़ित हैं या उनका ब्लड शुगर स्तर नियंत्रित नहीं रह पाता। ऐसे में रोजमर्रा के भोजन को लेकर असमंजस स्वाभाविक है, खासकर आलू और शकरकंद जैसी आम खाद्य सामग्री को लेकर। कुछ लोग आलू को पूरी तरह हानिकारक मानते हैं, तो कुछ शकरकंद को बेहद लाभकारी बताते हैं।
हालांकि, डायबिटीज में किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह त्यागना जरूरी नहीं, बल्कि सही मात्रा और तरीके का चुनाव अहम होता है।
ब्लड शुगर इस बात पर निर्भर करता है कि भोजन कितनी तेजी से पचकर ग्लूकोज में बदलता है। इसे ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) कहा जाता है। उच्च जीआई वाले खाद्य पदार्थ रक्त में शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। इसी आधार पर आलू और शकरकंद की तुलना की जाती है।
आलू को अक्सर डायबिटीज के लिए नुकसानदेह समझा जाता है, लेकिन सभी किस्मों का प्रभाव एक जैसा नहीं होता। कुछ किस्मों में ऐसा स्टार्च होता है जो धीरे पचता है और शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता। उबले और ठंडे किए गए आलू में रेसिस्टेंट स्टार्च की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे उसका प्रभाव कुछ हद तक नियंत्रित हो जाता है। हालांकि तले हुए या अत्यधिक मसालेदार आलू से बचना चाहिए।
दूसरी ओर, शकरकंद में फाइबर अधिक होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम माना जाता है। इसमें विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। फिर भी, अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह भी रक्त शुगर बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, डायबिटीज में संतुलित आहार, उचित मात्रा और नियमित जीवनशैली सबसे महत्वपूर्ण है। सही चुनाव और संयम से दोनों ही खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में शामिल किए जा सकते हैं। (With inputs from IANS)


