सेहत की अनदेखी से बढ़ रहीं पेट और सांस की समस्याएं, अपान वायु मुद्रा से मिलेगी राहत

नई दिल्ली: तेज रफ्तार जीवनशैली में सेहत आज एक बड़ी चुनौती बन गई है। गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या, बढ़ता तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी का सीधा असर पाचन और सांस से जुड़ी समस्याओं पर पड़ रहा है। गैस, अपच, पेट फूलना और बार-बार हिचकी आना अब आम शिकायतें बन चुकी हैं।
हिचकी आना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब यह बार-बार या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक, हिचकी तब आती है जब डायफ्राम अचानक सिकुड़ जाता है और सांस लेने में रुकावट पैदा होती है। इसका एक प्रमुख कारण पाचन तंत्र का सही ढंग से काम न करना है। ज्यादा या जल्दी-जल्दी खाना, तला-भुना व भारी भोजन, शराब का सेवन, तनाव, घबराहट और कभी-कभी अत्यधिक उत्साह भी हिचकी को बढ़ा सकता है।
योग शास्त्रों में शरीर के भीतर पांच प्रकार की वायु का उल्लेख मिलता है, जिनमें अपान वायु का संबंध पेट के निचले हिस्से से होता है। यह वायु मल-मूत्र त्याग, गैस निष्कासन और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करती है। जब अपान वायु असंतुलित हो जाती है, तो गैस, कब्ज, अपच और हिचकी जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। अपान वायु मुद्रा इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए बनाई गई है। यह शरीर की ऊर्जा को सही दिशा देती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है।
अपान वायु मुद्रा करना बेहद आसान है। इसे जमीन पर आसन लगाकर या कुर्सी पर सीधे बैठकर किया जा सकता है। सबसे पहले रीढ़ को सीधा रखें ताकि ऊर्जा का प्रवाह ठीक रहे। आंखें बंद कर कुछ देर गहरी और धीमी सांस लें। फिर तर्जनी उंगली को मोड़ें, मध्य और अनामिका उंगली को अंगूठे से मिलाएं और छोटी उंगली को सीधा रखें। इस अवस्था में शांत मन से सांस पर ध्यान केंद्रित करें।
लगातार हिचकी व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर सकती है। ऐसे में योग और आयुर्वेद सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रदान करते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, अपान वायु मुद्रा हिचकी और पाचन संबंधी समस्याओं में काफी लाभकारी है।
मंत्रालय का कहना है कि इस मुद्रा के दौरान हाथों की उंगलियों से जुड़े ऊर्जा बिंदु सक्रिय होते हैं, जिससे पेट और छाती के बीच संतुलन बनता है और डायफ्राम को आराम मिलता है। नतीजतन, हिचकी धीरे-धीरे अपने आप रुक जाती है। यह मुद्रा पेट में फंसी गैस को बाहर निकालने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी सहायक है।
अपान वायु मुद्रा के लाभ केवल हिचकी तक सीमित नहीं हैं। इसके नियमित अभ्यास से गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी पेट की समस्याओं में राहत मिलती है। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी मानी जाती है, क्योंकि इससे रक्त संचार सुधरता है। मानसिक तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और सही तरीके से सांस के साथ इसका अभ्यास करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। (With inputs from IANS)


