मनोचिकित्सा (Psychiatry) और जेनेटिक्स के सेक्टर में हुए एक बड़े इंटरनेसनल स्टडी ने मानसिक रोगों के इलाज की पारंपरिक सोच को चुनौती दी है. 'नेचर' (Nature) पत्रिका में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार, कई मानसिक बीमारियां अलग-अलग न होकर एक ही जैसे जीन से जुड़ी होती हैं. इसका मतलब है कि भविष्य में मरीजों को मुट्ठी भर अलग-अलग दवाएं लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

5 मेन कैटगरी में बांटे मानसिक रोग

शोधकर्ताओं ने 10 लाख से अधिक मरीजों के रिकॉर्ड का 5 सालों तक विश्लेषण किया. उन्होंने पाया कि 14 प्रमुख मानसिक विकारों को उनके अनुवांशिक (Genetic) समानता के आधार पर 5 बेसिक कैटगरी में रखा जा सकता है.

  1. नशा संबंधी विकार (Substance Use Disorders)- शराब या नशीले पदार्थों की लत।
  2. आंतरिक स्थितियाँ (Internalizing Conditions)-इसमें अवसाद (Depression), चिंता (Anxiety) और PTSD शामिल हैं।
  3. न्यूरोडेवलपमेंटल स्थितियां-ऑटिज्म और ADHD.
  4. अनिवार्य विकार (Compulsive Conditions)-ओसीडी (OCD), एनोरेक्सिया और टूरेट सिंड्रोम.
  5. गंभीर मानसिक विकार-बाइपोलर डिसऑर्डर और सिजोफ्रेनिया.

'एक बीमारी, एक इलाज' की ओर कदम

अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बाइपोलर डिसऑर्डर और सिजोफ्रेनिया के 70 प्रतिशत जेनेटिक कारण एक ही हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के प्रोफेसर एंड्रयू ग्रोटजिंगर के अनुसार, वर्तमान में कई मरीजों को एक साथ 3-4 अलग-अलग बीमारियों का टैग दे दिया जाता है. वे इसे एक उदाहरण से समझाते हैं- जैसे अगर आपको सर्दी, खांसी और गले में खराश है, तो डॉक्टर आपको तीन अलग बीमारियां बताकर तीन अलग दवाएं दे, तो यह गलत होगा. ठीक वैसे ही, मानसिक रोगों में भी जड़ एक ही हो सकती है.इस रिसर्च से यह भी समझ आता है कि क्यों एक ही एंटी-डिप्रेसेंट दवा अवसाद के साथ-साथ चिंता (Anxiety) पर भी प्रभावी होती है.

बायोलॉजी और दिमाग का संबंध

वैज्ञानिकों ने हमारे जेनेटिक कोड में 238 ऐसे वेरिएंट खोजे हैं जो इन 14 विकारों से जुड़े हैं. खासकर क्रोमोसोम 11 पर जीन का एक ऐसा ग्रुप मिला है जो 8 अलग-अलग मानसिक बीमारियों के जोखिम को बढ़ाता है. यह हिस्सा डोपामाइन (Dopamine) जैसे रसायनों को कंट्रोल करता है, जो हमारे मूड और ध्यान के लिए जिम्मेदार हैं.

भविष्य की राह

हालांकि यह अध्ययन मुख्य रूप से यूरोपीय पूर्वजों के डेटा पर आधारित है, लेकिन यह साफ करता है कि मानसिक स्वास्थ्य को केवल व्यवहार के आधार पर नहीं, बल्कि बायोलॉजी (Biology) के आधार पर समझने की जरूरत है. इससे न केवल नई थेरेपी विकसित होंगी, बल्कि मरीजों के मन से 'कई बीमारियों' का डर भी कम होगा.

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मानसिक रोगों के इलाज की पारंपरिक सोच को चुनौती दी है. ये रिसर्च एक बड़ा बदलाव हो सकता है.
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.