देसी घी में छिपा है सौंदर्य का खजाना, झुर्रियों और रूखी त्वचा से मिलेगी राहत

नई दिल्ली – आयुर्वेद में शुद्ध घी को सदियों से 'अमृत' कहा जाता रहा है, और इसके पीछे कोई बिना कारण नहीं है। यह सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य और मनोबल को मजबूत करने में ही सहायक नहीं है, बल्कि शरीर के लिए भी अनेक लाभ प्रदान करता है। घी का नियमित और संतुलित उपयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने के साथ-साथ त्वचा और बालों के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
घी पाचन तंत्र के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। यह कब्ज की समस्या को दूर करता है, भोजन को पचाने में मदद करता है और शरीर में पोषण के अवशोषण को बढ़ाता है। इसके साथ ही घी हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बनाने में भी मदद करता है। आयुर्वेद में घी को ठंडा (शीतल), चिकना (स्निग्ध) और रसायन माना गया है, जो शरीर में वात और कफ दोष को संतुलित रखकर अनेक बीमारियों से बचाव करता है।
त्वचा के लिए घी का महत्व भी बहुत अधिक है। यह त्वचा को गहराई से पोषण प्रदान करता है, सूखापन और ड्राइनेस को कम करता है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाता है। नियमित सेवन और सही मात्रा में इस्तेमाल करने पर यह उम्र बढ़ने के लक्षण जैसे झुर्रियां और त्वचा की कमजोर बनावट को धीमा करने में मदद करता है। सर्दियों में त्वचा की रूखापन और क्रैकिंग से बचाने के लिए घी का आहार में शामिल होना लाभकारी होता है।
इसे दिन के भोजन में थोड़ी मात्रा में लिया जा सकता है, जबकि रात में चेहरे के रूखे हिस्सों पर हल्का घी लगाना भी फायदेमंद है।
हालांकि, घी का सेवन करते समय कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक है। जिन लोगों का पाचन कमजोर है, उन्हें इसे सीमित मात्रा में लेना चाहिए। ऑयली या तैलीय त्वचा वाले लोग घी का प्रयोग कम करें, क्योंकि यह मुंहासों और एक्ने का कारण बन सकता है। इसके अलावा, दिल की बीमारी या मधुमेह के मरीजों को घी लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए, क्योंकि घी के अधिक सेवन से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
इस प्रकार, शुद्ध और संतुलित घी का उपयोग केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा और मन की ताजगी के लिए भी बेहद लाभकारी है। यह प्राकृतिक तरीका शरीर और त्वचा को पोषण देने, उम्र बढ़ने के प्रभाव को धीमा करने और सर्दियों में रूखी त्वचा से बचाने में मदद करता है। (With inputs from IANS)


