नई दिल्ली: गर्भावस्था में पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) लेने से अजन्मे बच्चों में ऑटिज्म, एडीएचडी या बौद्धिक विकलांगता का कोई खतरा नहीं होता है। यह निष्कर्ष शनिवार को प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आया। इस स्टडी ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पैरासिटामोल के उपयोग को लेकर उठाए गए सवालों को भी खारिज किया।

पैरासिटामोल प्रेग्नेंसी में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली दर्द निवारक और बुखार कम करने वाली दवा है। यह नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं और ओपिओइड्स की तुलना में सुरक्षित मानी जाती है और डब्ल्यूएचओ की आवश्यक दवाओं की सूची में भी शामिल है।

43 स्टडीज़ के आधार पर जर्नल The Lancet Obstetrics, Gynecology and Women’s Health में प्रकाशित सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस ने गर्भावस्था में पैरासिटामोल के इस्तेमाल को सुरक्षित ठहराया है।

सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स, यूके की प्रो. अस्मा खलील ने कहा कि इस समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि मां द्वारा पैरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज्म, एडीएचडी या बौद्धिक विकलांगता का खतरा बढ़ता है। लंबे फॉलो-अप और तुलनात्मक अध्ययन में भी परिणाम समान रहे।

यूके, इटली और स्वीडन के शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि पहले की पारंपरिक ऑब्जर्वेशनल स्टडीज़ में दिखाए गए संबंध पैरासिटामोल के कारण नहीं बल्कि मां की बीमारी, बुखार, जेनेटिक संवेदनशीलता या पर्यावरणीय कारणों से जुड़े थे।

उन्होंने यह भी कहा कि पैरासिटामोल से बचने पर गर्भवती महिलाओं और भ्रूण को बिना इलाज के दर्द और बुखार से जुड़े जोखिम का सामना करना पड़ सकता है, जैसे गर्भपात, समय से पहले जन्म, या जन्मजात दोष।

यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी, यूके मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी और हेल्थ कनाडा जैसी वैश्विक रेगुलेटरी एजेंसियां भी पैरासिटामोल की सुरक्षित प्रोफाइल का समर्थन करती हैं। (With inputs from IANS)

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अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था में पैरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज्म या ADHD का खतरा नहीं बढ़ता।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.