नई दिल्ली: आज की व्यस्त और अस्थिर जीवनशैली में कई लोगों को आधी रात में भोजन करने की आदत हो गई है। खासकर युवा और कामकाजी वर्ग में यह आम बात है कि सोने से ठीक पहले भी कुछ न कुछ खाने की इच्छा होती है। लोग इसे अक्सर हल्के स्नैक्स या मिठाई के रूप में लेते हैं, परंतु यह आदत स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।

नेशनल हेल्थ मिशन ने विशेष रूप से सलाह दी है कि रात के समय भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ पेट भरने का काम नहीं करता बल्कि पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म, पाचन तंत्र और नींद पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, रात में शरीर को विश्राम और रिकवरी की आवश्यकता होती है। यदि सोने के समय के करीब भोजन किया जाता है, तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और कैलोरी सही तरीके से पच नहीं पाती। इसके परिणामस्वरूप वजन तेजी से बढ़ता है और मोटापे का खतरा उत्पन्न होता है। इसके अलावा, देर रात भोजन डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और अन्य मेटाबोलिक समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

नींद पर भी देर रात का भोजन बुरा असर डालता है। भारी या मीठा भोजन खाने से एसिड रिफ्लक्स, अपच और नींद में खलल जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। नींद न आने के कारण थकान, चिड़चिड़ापन, कमजोर इम्युनिटी और मानसिक तनाव बढ़ते हैं। लगातार देर रात स्नैकिंग की आदत डिप्रेशन और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस आदत को बदलने के लिए कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं। रात का भोजन सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले करें। रात 8-9 बजे के बाद चिप्स, बिस्किट, चॉकलेट, आइसक्रीम या तला-भुना भोजन न लें। यदि भूख लगे तो हल्का विकल्प जैसे एक गिलास दूध पर्याप्त है। दिन में संतुलित भोजन करें और नियमित व्यायाम की आदत डालें, ताकि रात में भूख नियंत्रित रहे।

अतः छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से न केवल मोटापा रोका जा सकता है, बल्कि पाचन बेहतर होता है, नींद गहरी आती है और शरीर फिट रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस तरह की सावधानियां अपनाकर लंबी अवधि में स्वस्थ जीवनशैली सुनिश्चित की जा सकती है। (With inputs from IANS)

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आधी रात में खाने की आदत से सेहत बिगड़ती है और मोटापा व तनाव बढ़ते हैं।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.