आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, अनियमित दिनचर्या और बढ़ता मानसिक दबाव लोगों की सेहत पर गहरा असर डाल रहा है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोबाइल और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना—ये सभी आदतें कम उम्र में ही थकान, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, सांस लेने में परेशानी और रक्त संचार से जुड़ी समस्याओं को जन्म दे रही हैं। कई लोग दिनभर आराम करने के बाद भी खुद को ऊर्जाहीन महसूस करते हैं।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, ऐसी कई समस्याएं शरीर में ऊर्जा और पंचतत्वों के असंतुलन के कारण होती हैं। विशेष रूप से जब शरीर में वायु तत्व संतुलन से बाहर हो जाता है, तो व्यक्ति जल्दी थक जाता है, मन अस्थिर रहता है और शरीर में सुस्ती बनी रहती है। ऐसे में योग और हस्त मुद्राएं शरीर और मन को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन्हीं सरल लेकिन प्रभावी योग अभ्यासों में से एक है गरुड़ मुद्रा।

गरुड़ मुद्रा को वायु तत्व से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसका नियमित अभ्यास शरीर की सक्रियता बढ़ाने में मदद करता है और रक्त संचार को बेहतर बनाता है। जो लोग ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह मुद्रा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। यह हाथ-पैरों में ठंडक, सुन्नपन और कमजोरी जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक है। बेहतर रक्त प्रवाह से शरीर के सभी अंगों तक पोषण सही ढंग से पहुंचता है, जिससे व्यक्ति खुद को अधिक चुस्त और ऊर्जावान महसूस करता है।

महिलाओं की सेहत के लिहाज से भी गरुड़ मुद्रा उपयोगी मानी जाती है। मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द, ऐंठन और असहजता को कम करने में यह सहायक हो सकती है। इसके अलावा, यह सांस से जुड़ी हल्की समस्याओं में भी राहत देती है और शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित रखती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी गरुड़ मुद्रा का सकारात्मक प्रभाव देखा जाता है। जिन लोगों को बार-बार मूड बदलने, चिड़चिड़ापन, डर या अंदरूनी बेचैनी की शिकायत रहती है, उनके लिए इसका नियमित अभ्यास लाभकारी हो सकता है। यह मन को शांत करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद करता है।

गरुड़ मुद्रा का अभ्यास सुबह के समय करना सबसे उपयुक्त माना जाता है, जब मन शांत और वातावरण सकारात्मक होता है। रोजाना 20 से 30 मिनट तक इसका अभ्यास किया जा सकता है।

इस मुद्रा को करने के लिए किसी शांत स्थान पर आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं। रीढ़ और गर्दन सीधी रखें। दोनों हथेलियों को सामने लाकर दाहिने हाथ को बाएं हाथ के ऊपर रखें और अंगूठों को आपस में फंसा लें। आंखें बंद रखें और सांस को सामान्य रखते हुए ध्यान केंद्रित करें। कुछ ही समय में मन और शरीर में शांति का अनुभव होने लगता है।

नियमित अभ्यास से गरुड़ मुद्रा न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक साबित हो सकती है।

With Inputs From IANS

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बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या और बढ़ता मानसिक दबाव लोगों की सेहत पर सीधा असर डाल रहे हैं।
Kanchan Chaurasiya
Kanchan Chaurasiya

Kanchan Chaurasiya joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Marketing Coordinator. She holds a Bachelor's degree in Arts from Delhi University and has completed certifications in digital marketing. With a strong interest in health news, content creation, hospital updates, and emerging trends, Kanchan manages social media, news coverage, and public relations activities. She coordinates media outreach, creates press releases, promotes healthcare professionals and institutions, and supports health awareness campaigns to ensure accurate, engaging, and timely communication for the medical community and the public.