नई दिल्ली: आजकल की तेज और व्यस्त जीवनशैली में तनाव होना सामान्य हो गया है। कामकाजी और निजी जीवन की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता है, जिससे तनाव को नियंत्रित करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।ऐसे में न चाहते हुए भी जब शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ने लगता है और इसी के साथ शरीर के बाकी हॉर्मोन भी असंतुलित हो जाते हैं। ऐसे में अगर लंबे समय तक लगातार यही स्तर बना रहता है, तो यह शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

कॉर्टिसोल को सरल भाषा में तनाव हार्मोन के नाम से जाना जाता है। यह दोनों किडनी के ऊपर बनी एक ग्रंथि होती है, जिसे एड्रेनल ग्लैंड कहा जाता है। इसकी सक्रियता अगर शरीर में ज्यादा होती है, तो यह शरीर और दिमाग दोनों के लिए नुकसानदायक बन जाता है।

यह खराब जीवनशैली, तनाव, कम नींद, खराब खाना और कम शारीरिक गतिविधियों से अधिक बनने लगता है। इससे चिंता, वजन बढ़ना, कमजोरी महसूस होना, सिर भारी होना और नींद आने में परेशानी बनी रहती है, लेकिन आयुर्वेद में कॉर्टिसोल को कम करने के प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं।

कॉर्टिसोल को कम करने के लिए गहरी नींद बहुत जरूरी है। अच्छी और गहरी नींद लेने से शरीर में ग्रोथ हॉर्मोन बनता है, जो कॉर्टिसोल को कम करने में मदद करता है। रोजाना कम से कम 8-10 घंटे की नींद जरूर लें। इससे मन और तन दोनों हल्का महसूस होता है।

दिनचर्या में इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाएं। साथ ही, बार-बार खाने से बचे और तय समय पर खाना खाए, जिससे पेट को खाना पचाने का पूरा समय मिले और पोषण भी पूरे शरीर को मिले। इंटरमिटेंट फास्टिंग कॉर्टिसोल को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है।

कॉर्टिसोल को कम करने में धूप और विटामिन डी का बड़ा रोल है। रोजाना 10 मिनट की धूप जरूर लें। इससे शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी होती है और कॉर्टिसोल का प्रभाव शरीर पर कम देखने को मिलता है। इसके साथ ही पोटेशियम युक्त आहार लेना भी लाभकारी होता है। अपने आहार में केला, नारियल पानी, हरी सब्जियां, टमाटर और अखरोट को जरूर शामिल करें। (With inputs from IANS)

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कॉर्टिसोल हार्मोन तनाव को बढ़ाता है और इसके स्तर को प्राकृतिक उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.