आज की तेज़ रफ्तार और भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपने शरीर और मन की असली ज़रूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। देर रात तक जागना, अनियमित खानपान, मोबाइल और स्क्रीन के सामने घंटों बिताना और लगातार बना रहने वाला तनाव धीरे-धीरे हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है। इसका नतीजा थकान, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और कई तरह की शारीरिक समस्याओं के रूप में सामने आता है। ऐसे में प्राकृतिक दिनचर्या हमें फिर से संतुलन और स्वस्थ जीवन की ओर लौटने का रास्ता दिखाती है। यह कोई कठोर नियमों वाली व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रकृति की लय के साथ सहज रूप से जीने की कला है।

प्राकृतिक दिनचर्या की शुरुआत सुबह से होती है। सूर्योदय से पहले उठना आयुर्वेद और योग दोनों में बेहद लाभकारी माना गया है। इस समय वातावरण शांत, स्वच्छ और ऊर्जा से भरपूर होता है, जिससे मन अधिक एकाग्र रहता है। सुबह उठकर हल्की सैर, योगासन, प्राणायाम या ध्यान करने से न केवल शरीर में स्फूर्ति आती है, बल्कि मन भी शांत और सकारात्मक बना रहता है। यही समय खुद से जुड़ने, अपने विचारों को स्पष्ट करने और दिन की बेहतर शुरुआत करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

शरीर की प्राकृतिक जरूरतों को समझना और उनका सम्मान करना भी स्वस्थ दिनचर्या का अहम हिस्सा है। भूख लगने पर भोजन करना, नींद आने पर सोना और शौच या मूत्र को अनावश्यक रूप से न रोकना—ये छोटी-छोटी आदतें लंबे समय में बड़े फायदे देती हैं। इन जरूरतों को बार-बार दबाने से पाचन, मूत्र संबंधी समस्याएं और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

स्वच्छता का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। रोज सुबह और रात दांत साफ करना, जीभ की सफाई, नियमित स्नान और साफ कपड़े पहनना शरीर को रोगों से बचाता है और मन को भी तरोताजा रखता है। तेल से हल्की मालिश करने से मांसपेशियों की थकान कम होती है, रक्तसंचार बेहतर होता है और शरीर को आराम मिलता है। यह स्वयं के प्रति देखभाल और प्रेम का एक सरल तरीका है।

भोजन के मामले में प्राकृतिक दिनचर्या सादगी और संतुलन पर जोर देती है। समय पर, सीमित मात्रा में और पौष्टिक भोजन करना स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। बहुत अधिक तला-भुना, जंक फूड या देर रात का खाना शरीर को भारी, सुस्त और बीमारियों के प्रति संवेदनशील बना देता है। मौसम, उम्र और शरीर की क्षमता के अनुसार भोजन चुनना समझदारी है। पानी भी नियमित अंतराल पर पीना चाहिए—न बहुत कम और न ही जरूरत से ज्यादा।

शारीरिक गतिविधि और विश्राम के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। रोज थोड़ा-बहुत व्यायाम शरीर को मजबूत और सक्रिय रखता है, जबकि रात में 6 से 8 घंटे की गहरी नींद शरीर और दिमाग दोनों को पूरी तरह आराम देती है। बिना जरूरत दिन में बार-बार सोने की आदत से बचना चाहिए।

कुल मिलाकर, प्राकृतिक दिनचर्या अपनाकर हम न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि मानसिक शांति, ऊर्जा और जीवन में संतुलन भी पा सकते हैं। यह एक सरल, टिकाऊ और प्रभावी तरीका है बेहतर जीवन जीने का।

With Inputs From IANS

IANSNatural RoutineStress-Free Life

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आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में देर रात तक जागना, अनियमित खानपान, स्क्रीन का अधिक उपयोग और लगातार तनाव हमारे शरीर और मन को नुकसान पहुंचाते हैं।
Kanchan Chaurasiya
Kanchan Chaurasiya

Kanchan Chaurasiya joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Marketing Coordinator. She holds a Bachelor's degree in Arts from Delhi University and has completed certifications in digital marketing. With a strong interest in health news, content creation, hospital updates, and emerging trends, Kanchan manages social media, news coverage, and public relations activities. She coordinates media outreach, creates press releases, promotes healthcare professionals and institutions, and supports health awareness campaigns to ensure accurate, engaging, and timely communication for the medical community and the public.