गर्मी और जलवायु परिवर्तन का नया खतरा, 2050 तक फिजिकल इंएक्टिविटी से हो सकती हैं 7 लाख मौतें, स्टडी में खुलासा

जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान न केवल पर्यावरण को बदल रहा है, बल्कि यह हमारे शरीर की एक्टिविज्म को भी कम कर रहा है. द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में जारी एक लेटेस्ट स्टडी में बताया गया है कि 2050 तक बढ़ती गर्मी के कारण होने वाली शारीरिक निष्क्रियता (Physical Inactivity) दुनिया भर में हर साल 4.7 लाख से 7 लाख मौतों का कारण बन सकती है.
गर्मी और आलस के बीच का साइंटिफिक रिलेशन
रिसर्चर ने 2000 से 2022 के बीच 156 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है. उन्होंने पाया कि जब औसत तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है, तो हर एक एक्स्ट्रा महीने के साथ ग्लोबल लेवल पर शारीरिक निष्क्रियता में 1.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है.गर्मी के कारण स्कीन में खून का फ्लो और पसीना बढ़ जाता है, जिससे दिल पर दबाव बढ़ता है. तापमान बढ़ने से शरीर जल्दी थक जाता है और पानी की कमी (Dehydration) का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे लोग एक्सरसाइज करने से बचते हैं. एयर-कंडीशनर गर्मी से राहत तो देते हैं, लेकिन ये लोगों को घर के अंदर बैठने और 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' (गतिहीन जीवनशैली) अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं.
भारत और दक्षिण एशिया पर मंडराता खतरा
स्टडी के अनुसार, भारत जैसे गर्म क्षेत्रों में शारीरिक निष्क्रियता का लेवल पहले से ही अधिक है. अनुमान है कि 2050 तक भारत में बॉडी एक्सटिवीज से जुड़ी मृत्यु दर प्रति 1,00,000 जनसंख्या पर 10.62 तक पहुंच सकती है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का अनुमान है कि 2030 तक गर्मी के तनाव (Heat Stress) के कारण दुनिया भर में काम के घंटों में 2.2 प्रतिशत की कमी आएगी, जो लगभग 8 करोड़ पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर है. इसका सबसे बुरा असर एग्रीकल्चर और मैनुफैक्चरिंग फील्ड पर पड़ेगा.
आर्थिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
डब्ल्यूएचओ (WHO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक वयस्क को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट हल्के एक्सरसाइज करना चाहिए. गर्मी के कारण एक्सरसाइज न करने से न केवल शारीरिक शक्ति कम होती है, बल्कि नींद में खलल और मानसिक एकाग्रता (Cognition) में भी कमी आती है. इससे कार्यस्थल पर प्रदर्शन गिरता है और उत्पादकता में अरबों डॉलर का नुकसान होता है.
अब व्यायाम सिर्फ पसंद नहीं, जरूरत है
रिसर्चर का कहना है कि शारीरिक गतिविधि को अब केवल एक 'पसंद' नहीं, बल्कि जलवायु-संवेदनशील जरूरी माना जाना चाहिए. इसके लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं जैसे पैदल चलने और साइकिल चलाने के लिए अधिक पेड़ और छायादार कॉरिडोर बनाना. जोखिम वाली आबादी के लिए ठंडे व्यायाम केंद्रों (Cooled Gyms) पर सब्सिडी देना. कार्यस्थलों पर गर्मी से सुरक्षा के कड़े नियम लागू करना.


