Abdominal Obesity: दुबले दिखने वाले लोग भी हो सकते हैं गंभीर बीमारियों के शिकार! जानें क्या है 'पेट का मोटापा' और इसके बचाव के उपाय

अगर कोई इंसान पतला-दुबला है तो कई तरह के नामों से बुलाया जाता है. यहां तक ये भी कहा जाता है कि पतले लोगों के पास बहुत ताकत होती है. भारत में एक आम धारणा है कि अगर कोई व्यक्ति दुबला-पतला दिख रहा है, तो वह स्वस्थ है. लेकिन डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, यह एक खतरनाक भ्रम हो सकता है. भारत में कई ऐसे लोग हैं जो बाहर से तो छरहरे दिखते हैं, लेकिन उनके आंतरिक अंगों के आसपास घातक वसा (Visceral Fat) जमा होती है. इसे ही 'एब्डोमिनल ओबेसिटी' या 'सेंट्रल ओबेसिटी' कहा जाता है.
क्या है एब्डोमिनल ओबेसिटी? (What is Visceral Fat)
एब्डोमिनल ओबेसिटी का अर्थ है पेट के आसपास और आंतरिक अंगों जैसे लिवर, हृदय और किडनी के चारों ओर चर्बी का ज्यादा जमा होना. सबक्यूटेनियस फैट बनाम विसरल फैट- त्वचा के नीचे दिखने वाली चर्बी उतनी खतरनाक नहीं होती, जितनी अंगों के बीच छिपी 'विसरल फैट' होती है. यह वसा मेटाबॉलिक रूप से सक्रिय होती है और शरीर में सूजन (Inflammation) और इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है.
क्यों है यह अधिक खतरनाक?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने चेतावनी दी है कि पेट का मोटापा निम्नलिखित बीमारियों का मुख्य कारण है. टाइप 2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग (CVD) और स्ट्रोक का खतरा, फैटी लिवर और डिस्लिपिडेमिया. हालिया रिसर्च के अनुसार, विसरल फैट का अधिक स्तर मस्तिष्क में 'एमिलॉयड' (Amyloid) के जमा होने से भी जुड़ा है, जो अल्जाइमर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है.
किसे है सबसे अधिक खतरा?
एक्सपर्ट के अनुसार, अगर पुरुषों की कमर 40 इंच और महिलाओं की कमर 35 इंच से अधिक है, तो यह विसरल फैट जमा होने का संकेत है. चौंकाने वाली बात यह है कि 'हेल्दी वेट' वाले लोग भी इस मोटापे का शिकार हो सकते हैं, क्योंकि यह वसा बाहर से हमेशा दिखाई नहीं देती.
मोटापा कम करने और स्वस्थ रहने की ऐसी करें तैयारी
- केवल वजन कम करना काफी नहीं है, बल्कि शरीर की संरचना (Body Composition) में सुधार करना जरूरी है.
- संतुलित आहार-साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और गुड फैट्स को अपनी डाइट में शामिल करें. पोषण और पोर्शन कंट्रोल (Portion Control) पर ध्यान दें.
- रेसिस्टेंस ट्रेनिंग-केवल कार्डियो ही नहीं, बल्कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी करें। इससे फैट कम होने के साथ मांसपेशियां सुरक्षित रहती हैं और मेटाबॉलिज्म सुधरता है.
- जीवनशैली में अनुशासन- पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) लें और तनाव कम करने के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं.
- चिकित्सीय परामर्श-गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह पर वजन घटाने वाली दवाओं या बेरिएट्रिक सर्जरी (जैसे गैस्ट्रिक बाईपास) पर विचार किया जा सकता है.


