सिद्ध चिकित्सा प्रणाली भारत की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में से एक है. इस प्रणाली का आधार 'उयिर तातुक्कल' है. उयिर तातुक्कल का मतलब होता है जीवन की मूल शक्तियां या जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाली तीन आवश्यक ताकतें. ये तीन शक्तियां हैं - वली, अजल और अयम. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, ये तीनों तत्व मिलकर मानव शरीर के हर कार्य को नियंत्रित करते हैं. साथ ही ये किसी व्यक्ति की शारीरिक बनावट और प्रकृति को भी तय करते हैं. इनके बीच सही संतुलन बनाए रखने से शरीर का प्रदर्शन बेहतर होता है और पूरी सेहत बनी रहती है.

अपने शरीर के शक्तियों को करें संतुलित

ये तीन तत्व पांच महाभूतों आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी से बने होते हैं। वली मुख्य रूप से वायु और आकाश से, अजल अग्नि से और अयम जल व पृथ्वी से जुड़ा है. सिद्ध चिकित्सा में वली, अजल और अयम का आपसी तालमेल बहुत महत्वपूर्ण है. जब ये तीनों संतुलित रहते हैं, तो व्यक्ति स्वस्थ और ऊर्जावान रहता है. लेकिन इनमें असंतुलन हो जाए, तो अलग-अलग बीमारियां पैदा हो सकती हैं. सिद्ध प्रणाली में इलाज का मुख्य उद्देश्य इन्हीं तीन शक्तियों को संतुलित करना होता है.

  1. वली मुख्य रूप से शरीर की गति और तंत्रिका तंत्र संबंधी कार्यों को संभालता है. यह हलचल, मूवमेंट और न्यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है. वली को आधुनिक विज्ञान की भाषा में नर्वस सिस्टम से जोड़ा जाता है, जो शरीर की हरकतों और संवेदनाओं को मैनेज करता है.
  2. दूसरी शक्ति अजल है, जो पाचन प्रक्रिया और शरीर की गर्मी को नियंत्रित करती है. यह मेटाबॉलिज्म को बनाए रखती है, भोजन को पचाती है और शरीर के तापमान को संतुलित रखती है. अज़ल की वजह से ही शरीर में ऊर्जा उत्पादन होता है और पाचन तंत्र सुचारू रूप से चलता है.
  3. तीसरी शक्ति अयम है, जो शरीर की संरचनात्मक मजबूती और स्थिरता प्रदान करती है। यह हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूत बनाती है। अयम शरीर को स्थिरता देता है और तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखता है.

सिद्ध चिकित्सा बीमारियों का इलाज व्यक्ति की उम्र, आदतें, पर्यावरण और शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर करती है। उयिर तातुक्कल को समझकर हम अपनी जीवनशैली सुधार सकते हैं और बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं.

विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी उपचार से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लें.

Input IANS

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सिद्ध चिकित्सा प्रणाली भारत की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में से एक है इस प्रणाली का आधार 'उयिर तातुक्कल' है.
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.