क्यों होता है स्लिप डिस्क? आयुर्वेद से जानिए कारण और बचाव के तरीके

नई दिल्ली: आजकल पीठ दर्द की शिकायत आम हो गई है, और इसका प्रमुख कारण बन रहा है स्लिप डिस्क। आयुर्वेद में इसके कारण और बचाव के उपायों पर गहराई से ध्यान दिया गया है।
स्लिप डिस्क तब होती है जब रीढ़ की हड्डियों के बीच की इंटरवर्टिब्रल डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है या दब जाती है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप पीठ और पैरों में दर्द, झनझनाहट या कमजोरी दिखाई देती है। आयुर्वेद इसे कटिग्रह या कटिशूल जैसी समस्याओं से जोड़ता है और इसके पीछे वात दोष के असंतुलन को जिम्मेदार मानता है।
आधुनिक जीवनशैली के कारण यह समस्या बढ़ती है – लंबे समय तक बैठना, कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करना, भारी सामान उठाने की गलत आदतें, उम्र बढ़ना, मोटापा, चोट या मांसपेशियों की कमजोरी। इन सभी कारणों से रीढ़ की हड्डियों और डिस्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: केवल दर्द को कम करना पर्याप्त नहीं है। शरीर की लचीलापन और मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना भी जरूरी है।
रोकथाम और उपचार के उपाय:
- हर 30–40 मिनट पर थोड़ी देर चलना और खिंचाव करना।
- हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग।
- योगाभ्यास जैसे भुजंगासन, मकरासन, शवासन।
- आयुर्वेदिक तेल मालिश और गर्म सिकाई।
- संतुलित आहार और शरीर का वजन नियंत्रित रखना।
इन उपायों से न केवल दर्द और अकड़न कम होती है, बल्कि रीढ़ की हड्डियों की मजबूती बढ़ती है और डिस्क पर दबाव कम होता है। नियमित अभ्यास और सावधानी से स्लिप डिस्क से होने वाली गंभीर परेशानियों को टाला जा सकता है। (With inputs from IANS)


