हाल ही में गाजियाबाद में तीन बहनों की दुखद आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. जहां शुरुआती तौर पर इसे ऑनलाइन गेमिंग की लत माना जा रहा था, वहीं सुसाइड नोट से संकेत मिले कि वे कोरियन ड्रामा (K-Dramas) और K-Pop की काल्पनिक दुनिया के प्रति जुनून की हद तक आकर्षित थीं. इस घटना ने बच्चों के स्क्रीन टाइम और उनके मानसिक स्वास्थ्य के बीच के गहरे संबंध पर एक नई बहस छेड़ दी है.

गेमिंग और कंटेंट की लत, व्यवहार नहीं, एक संकेत

शिक्षाविदों और डॉक्टरों का मानना है कि ऑनलाइन गेम्स या कंटेंट के प्रति अत्यधिक झुकाव केवल एक अनुशासन की समस्या नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक तनाव, अकेलेपन या शैक्षणिक दबाव का एक शुरुआती संकेत हो सकता है. एमिटी इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल अमिता मोहन के अनुसार, "हम गेमिंग को दुर्व्यवहार नहीं, बल्कि एक सिग्नल मानते हैं." जब कोई छात्र अचानक चिड़चिड़ा, थका हुआ या गुमसुम रहने लगता है, तो यह संकेत है कि वह असल दुनिया की चुनौतियों से भागकर डिजिटल दुनिया में शरण ले रहा है.

चेतावनी के संकेतों को कैसे पहचानें?

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. अचल भगत ने माता-पिता और स्कूलों को इन लक्षणों पर नज़र रखने की सलाह दी है.

  • गेमिंग या स्क्रीन टाइम में अचानक बहुत अधिक वृद्धि.
  • फोन या लैपटॉप हटाने पर अत्यधिक गुस्सा या चिड़चिड़ापन.
  • पढ़ाई में प्रदर्शन गिरना और नींद में खलल.
  • परिवार और दोस्तों से दूरी बना लेना.

डॉ. प्रशांत गोयल (श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट) बताते हैं कि जो बच्चे खुद को अकेला या असुरक्षित महसूस करते हैं, उन्हें गेम्स में तुरंत सफलता और नियंत्रण का अहसास होता है, जो उन्हें और अधिक आकर्षित करता है.

समाधान- प्रतिबंध नहीं, ऑप्शन चुनें

विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन टाइम पर अचानक पूर्ण प्रतिबंध लगाने से बच्चा आक्रामक हो सकता है या खुद को नुकसान पहुंचा सकता है. इसके बजाय बच्चों को खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और नेतृत्व वाली भूमिकाओं में व्यस्त रखें. उन्हें डिजिटल दुनिया के खतरों और संतुलन के बारे में शिक्षित करें. बच्चों से खुलकर बात करें ताकि उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए किसी काल्पनिक दुनिया की ज़रूरत न पड़े.एमएम पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रूमा पाठक के अनुसार, रणनीति का मुख्य आधार "प्रतिबंध नहीं, बल्कि बैलेंस" होना चाहिए.

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ऑनलाइन कंटेंट के प्रति झुकाव केवल एक अनुशासन की समस्या नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक तनाव के शुरुआती संकेत हो सकता है.
Priya Gupta
Priya Gupta

Priya Gupta brings over six years of dynamic journalism experience from leading Indian news agencies, including NDTV, News Nation, and Zee News. TV9 Bharatvarsh A seasoned reporter, she has covered key beats like politics, education, jobs, and international relations, delivering insightful analysis on national and global issues. Priya now drives coverage at health dailogues managing news updates in the health sector. She handles media outreach, develops press releases, spotlights healthcare professionals and institutions, and leads health awareness initiative