बाइपोलर डिसऑर्डर: उन्माद और अवसाद के बीच फंसा जीवन, डब्ल्यूएचओ से जानें समाधान

नई दिल्ली: हॉलीवुड अभिनेता रॉबर्ट कैराडाइन का 71 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उनके परिवार ने पुष्टि की कि वे लंबे समय से गंभीर मानसिक बीमारी, बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक स्थिति है जो व्यक्ति के मूड, ऊर्जा, गतिविधियों और सोच पर गंभीर प्रभाव डालती है।
इस बीमारी में व्यक्ति के मूड में बड़े उतार-चढ़ाव होते हैं। कभी वह अत्यधिक उत्साही या उन्मादी (मेनिया/हाइपोमेनिया) हो जाता है, तो कभी गहरी उदासी और अवसाद में डूब जाता है। WHO के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 37 मिलियन लोग (वैश्विक आबादी का 0.5%) बाइपोलर डिसऑर्डर से प्रभावित हैं। यह मुख्य रूप से कामकाजी उम्र के लोगों में दिखाई देता है, लेकिन युवाओं में भी हो सकता है। पुरुष और महिलाओं में इसका समान रूप से प्रभाव देखा जाता है।
बाइपोलर रोगियों को अक्सर गलत निदान, अपर्याप्त उपचार और समाज में कलंक का सामना करना पड़ता है, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।
WHO के अनुसार, बाइपोलर डिसऑर्डर के दो मुख्य चरण होते हैं:
उन्माद / हाइपोमेनिया:
व्यक्ति अत्यधिक ऊर्जा से भरा, खुश, उत्साहित या चिड़चिड़ा होता है। इस दौरान वह तेज़ बोलता है, कम सोता है, जोखिम भरे काम करता है और कभी-कभी भ्रम का अनुभव भी कर सकता है।
अवसाद:
व्यक्ति उदास, थका हुआ महसूस करता है, रुचि नहीं लेता, भूख या नींद में बदलाव होता है, अपराधबोध और निराशा महसूस करता है, और कभी-कभी आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं।
बाइपोलर जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करता है – रिश्ते, शिक्षा और करियर पर असर पड़ता है। इसके साथ ही आत्महत्या का जोखिम बढ़ जाता है। मरीज धूम्रपान, शराब या अन्य नशीली आदतों की ओर अधिक प्रवृत्त हो सकते हैं और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है।
उपचार और देखभाल:
दवाएं:
मूड स्टेबलाइजर (जैसे लिथियम, वैल्प्रोएट) और एंटीसाइकोटिक्स से उन्माद और अवसाद नियंत्रित किया जा सकता है और पुनरावृत्ति कम होती है।
मनोचिकित्सा:
संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी और पारिवारिक थेरेपी से लक्षण कम और रिकवरी तेज होती है।
जीवनशैली: नियमित नींद, व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव प्रबंधन आवश्यक हैं।
सहायता:
परिवार, दोस्त और सहायता समूह का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
WHO का कहना है कि सही देखभाल और समय पर उपचार से बाइपोलर डिसऑर्डर से प्रभावित व्यक्ति भी एक सार्थक और संतुलित जीवन जी सकते हैं। समाज में कलंक कम करना और उपचार तक पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। (With inputs from IANS)


