ऐसे टीके जो बच्चों को लगवाने बहुत जरूरी हैं, पर माता-पिता अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं!

माता-पिता बच्चों के रूटीन टीकाकरण करवाते हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण टीके ऐसे हैं जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका कारण है इन टीकों का तय किए गए सरकारी टीककारण कार्यक्रम में शामिल ना होना। इस कारण लोग ये सोचते हैं कि इन बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगवाने की जरूरत ही नहीं है। जबकि ये टीके बच्चों को गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने से बचा सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, सही समय पर टीकाकरण करना गंभीर बीमारी का इलाज कराने से कहीं ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी होता है।
ऐसे ही टीकों में से एक है फ्लू (Influenza) वैक्सीन। फ्लू को अक्सर लोग सामान्य मौसमी बीमारी मान लेते हैं, लेकिन छोटे बच्चों में यह गंभीर हो सकती है। फ्लू होने के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जैसे निमोनिया, सांस लेने में गंभीर समस्या, बैक्टीरियल संक्रमण, दौरे (Seizures), दिमाग में सूजन (Encephalitis) आदि हो सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि फ्लू का वायरस शरीर में तेज सूजन पैदा कर सकता है और कभी-कभी यह दिमाग को भी प्रभावित कर सकता है।
डॉ. योगेश कुमार गुप्ता के अनुसार, फ्लू वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। इसे 6 महीने की उम्र के बाद लगवाया जा सकता है। इसे हर साल लगवाने की सलाह दी जाती है क्योंकि वायरस के प्रकार बदलते रहते हैं।
फ्लू की वैक्सीन के अलावा जिन वैक्सीन को अक्सर माता-पिता इग्नोर करते हैं, वह है Pneumococcal वैक्सीन। यह वैक्सीन बच्चों को निमोनिया, रक्त संक्रमण और मेनिन्जाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों से बचाती है। यह विशेष रूप से छोटे बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि ये इन्फेक्शन तेजी से फैलते हैं। हाल ही में इस वैक्सीन को सरकारी वैक्सीन कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया है।
ऐसी ही एक और वैक्सीन है Meningococcal वैक्सीन। यह वैक्सीन एक ऐसे खतरनाक बैक्टीरिया से बचाती है, जो मेनिन्जाइटिस (दिमाग और रीढ़ की हड्डी का संक्रमण) का कारण बन सकता है। यह बीमारी अचानक तेज बुखार, सिरदर्द और गर्दन में अकड़न के साथ शुरू हो सकती है और तेजी से गंभीर हो सकती है।
टायफॉयड (Typhoid) की वैक्सीन भी बच्चों के लिए बहुत जरूरी वैक्सीन में से एक है। टायफॉयड एक बैक्टीरियल संक्रमण होता है, जो दूषित भोजन और पानी से फैलता है। अक्सर इस समस्या में तेज बुखार, पेट दर्द, कमजोरी, उल्टी आदि होती है। यह बीमारी गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकती है। कई बार इस बीमारी के कारण बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। इसलिए इसका टीकाकरण जरूरी है।
हेपेटाइटिस A की वैक्सीन भी बच्चों को लगवाने की डॉक्टर सलाह देते हैं। यह एक वायरल संक्रमण होता है, जो लिवर को प्रभावित करता है। इस बीमारी का कारण दूषित भोजन और पानी होता है और इसी के माध्यम से यह फैल सकता है। बच्चों में अक्सर बुखार, पीलिया और कमजोरी पैदा कर सकता है।
चिकनपॉक्स वैक्सीन को लेकर डॉ. योगेश कुमार गुप्ता कहते हैं, चिकनपॉक्स एक वायरल बीमारी है, जिसमें पूरे शरीर पर खुजली वाले दाने निकलते हैं। कई बार ये गंभीर हो सकती है. और इसके कारण त्वचा संक्रमण, निमोनिया, दिमाग में सूजन आदि हो सकता है। इसलिए इसकी वैक्सीन लगवाने से बच्चे को अस्पताल में भर्ती करने से बचाव किया जा सकता है।
हेल्थ एक्स्पर्ट के अनुसार, कई माता-पिता केवल सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल टीकों पर ध्यान देते हैं, लेकिन फ्लू, न्यूमोकोकल, मेनिंगोकोकल, टायफॉयड, हेपेटाइटिस-A और चिकनपॉक्स जैसे टीके भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।


