योग की अष्टांग प्रक्रिया में ध्यान को सातवां अंग माना जाता है। यह मन को एकाग्र करने और चित्त की वृत्तियों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया है। प्राचीन भारतीय परंपरा में ध्यान को आत्मज्ञान, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। आज की तेज़ और तनावपूर्ण जीवनशैली में ध्यान का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने में मदद करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ध्यान का नियमित अभ्यास तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक होता है। यह मन को शांत करता है और व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा, ध्यान करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक भावनाएं विकसित होती हैं और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।

ध्यान की शुरुआत करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। सबसे पहले शांत और स्वच्छ स्थान का चयन करना चाहिए, जहां बाहरी शोर या व्यवधान कम हो। रोज एक ही स्थान और एक ही समय पर ध्यान करने से मन धीरे-धीरे उस समय और स्थान के साथ जुड़ने लगता है, जिससे ध्यान में एकाग्रता बनाना आसान हो जाता है।

ध्यान के अभ्यास में नियमितता भी बेहद महत्वपूर्ण है। शुरुआत में 10 से 15 मिनट तक ध्यान करना पर्याप्त होता है। समय के साथ अभ्यास बढ़ाकर इसे धीरे-धीरे लंबा किया जा सकता है। निरंतर अभ्यास से मन स्थिर होने लगता है और ध्यान की गहराई बढ़ती जाती है।

ध्यान करते समय ‘ओम’ का उच्चारण भी लाभकारी माना जाता है। ‘ओम’ का जप मन को केंद्रित करने में मदद करता है और इसकी ध्वनि से उत्पन्न कंपन शरीर और मन दोनों को शांत करने में सहायक होते हैं। यह अभ्यास ध्यान की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बना सकता है।

ध्यान के दौरान मन में कई तरह के विचार आना स्वाभाविक है। ऐसे में उन्हें जबरदस्ती रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय उन्हें एक साक्षी भाव से देखना बेहतर होता है। धीरे-धीरे मन शांत होने लगता है और विचारों की गति कम हो जाती है।

ध्यान के लिए किसी एक प्रतीक, ज्योति, इष्ट देव या अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करना भी एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है। इससे मन भटकने की संभावना कम हो जाती है और ध्यान की प्रक्रिया सहज बनती है।

इसके अलावा, ध्यान से पहले शरीर को आराम देने के लिए हल्के योगासन और प्राणायाम करना भी फायदेमंद माना जाता है। नाड़ी शोधन, भस्त्रिका और भ्रामरी जैसे प्राणायाम शरीर और मन को ध्यान के लिए तैयार करते हैं। ध्यान के समय शरीर को आरामदायक मुद्रा में रखना चाहिए, ताकि लंबे समय तक बैठने में असुविधा न हो।

ध्यान का अभ्यास करते समय तुरंत परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह एक धीरे-धीरे विकसित होने वाली प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य और नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है। समय के साथ ध्यान व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करता है और मानसिक शांति तथा संतुलन प्रदान करता है।

With Inputs From IANS

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ध्यान योग की अष्टांग प्रक्रिया का सातवां अंग है, जो मन को एकाग्र करने और विचारों को शांत करने में मदद करता है।
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.