रोज 15-20 करें योग की वायु मुद्रा, पेट में गैस और जोड़ों के दर्द से मिलेगी निजात

नई दिल्ली: आजकल मोबाइल और लैपटॉप पर अधिक समय बिताना, असंतुलित खानपान और भागदौड़ भरी दिनचर्या हमारे शरीर को अंदर से थका देती हैं। इस दौरान लोग अक्सर पेट की समस्याएं, गैस, कब्ज, बेचैनी, घबराहट, जोड़ों का दर्द या नींद न आने जैसी परेशानियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये संकेत हैं कि शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है।
आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है, तब ही बीमारी उत्पन्न होती है। इस ऊर्जा को संतुलित करने का एक सरल और असरदार तरीका है हस्त मुद्राएं। उंगलियों के जरिए हम सीधे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ते हैं और शरीर के भीतर गहरी ताजगी महसूस करते हैं।
आयुर्वेद के मुताबिक शरीर पंचभूतों—आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी—से बना है। इनमें वायु तत्व सबसे अस्थिर माना जाता है। जब यह असंतुलित होता है, तो गैस, अपच, कब्ज, बेचैनी, जोड़ों का दर्द, तेज़ दिल की धड़कन और घबराहट जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
इसी वायु तत्व को नियंत्रित करने के लिए योग में वायु मुद्रा का अभ्यास किया जाता है। यह सरल मुद्रा अंगूठे और तर्जनी उंगली के माध्यम से वायु तत्व को संतुलित करती है। अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और तर्जनी उंगली वायु तत्व की। तर्जनी को मोड़कर अंगूठे के नीचे दबाने से अग्नि तत्व वायु पर नियंत्रण पाता है।
वायु मुद्रा करने का तरीका:
- किसी शांत जगह पर बैठें, रीढ़ सीधी रखें और आंखें बंद करें।
- तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के मूल में दबाएं, बाकी तीन उंगलियां सीधी रखें।
- सामान्य सांस लें और 15–20 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।
- सुबह खाली पेट और शांत मन से करना अधिक प्रभावी माना जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे कुर्सी पर या चलते-फिरते भी किया जा सकता है।
- इस मुद्रा का सबसे पहला असर तंत्रिका तंत्र पर दिखाई देता है। यह नर्व्स को शांत करती है, जिससे बेचैनी, घबराहट और तनाव कम होते हैं। जब दिमाग शांत होता है, तो शरीर के अंग बेहतर ढंग से काम करने लगते हैं। पाचन तंत्र पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
- गैस और अपच की समस्या अक्सर फंसी हुई वायु के कारण होती है। वायु मुद्रा इस फंसी हुई ऊर्जा को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे पेट हल्का महसूस होता है।
साथ ही, यह मुद्रा रक्त संचार को सुधारती है। बेहतर ब्लड फ्लो मांसपेशियों और जोड़ों तक पोषण पहुंचाता है, जिससे जोड़ों का दर्द, साइटिका और मांसपेशियों की जकड़न में भी राहत मिलती है। (With inputs from IANS)


