नई दिल्ली: आज की व्यस्त जीवनशैली में महिलाएं घर, परिवार और काम की जिम्मेदारियों में इतनी उलझी रहती हैं कि अक्सर अपने स्वास्थ्य और स्वयं की देखभाल के लिए समय नहीं निकाल पातीं। इसका प्रभाव धीरे-धीरे थकान, तनाव और कई शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में सामने आता है। महिलाओं के जीवन में किशोरावस्था, प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज और उम्र बढ़ने के अलग-अलग चरणों में विशेष चुनौतियां आती हैं।

जैसे किशोरावस्था में पीरियड्स से जुड़ी असुविधाएं, गर्भावस्था में वजन बढ़ना और हार्मोनल बदलाव, मेनोपॉज में हार्मोन असंतुलन और बुजुर्गावस्था में हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी। इन सभी चरणों में योग एक प्राकृतिक और प्रभावशाली उपाय के रूप में सामने आता है।

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा महिलाओं को सलाह देता है कि वे अपनी सेहत का ध्यान योग के माध्यम से रखें। संस्थान के अनुसार योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन को अंदर से बाहर तक स्वस्थ बनाए रखने की प्रक्रिया है। योग अभ्यास आंतरिक अंगों और ग्रंथियों को सक्रिय करता है, खून को शुद्ध करता है, रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है और शरीर की शक्ति और ऊर्जा बढ़ाता है। इसके अलावा, यह त्वचा की चमक और संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी बढ़ाने में मदद करता है।

महिलाओं के लिए कई योगासनों और प्राणायामों का विशेष महत्व है। उदाहरण के लिए भद्रासन पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं और पेल्विक क्षेत्र को मजबूत करने में मदद करता है। वज्रासन पाचन तंत्र को सुधारता है और गर्भाशय को स्वस्थ रखता है।

भुजंगासन पीठ और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और पीरियड्स के दर्द को कम करता है। सेतुबंधासन या ब्रिज पोज पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जो गर्भावस्था और प्रसव के बाद लाभकारी है। शशांकासन तनाव को कम कर शरीर और मन को रिलैक्स करता है, जबकि सुप्त बद्ध कोणासन मेनोपॉज के दौरान हार्मोन संतुलन और शांति प्रदान करता है। ताड़ासन, वृक्षासन और पादहस्तासन शरीर की सामान्य संतुलन और पोस्चर सुधारने में मदद करते हैं।

प्राणायाम भी महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी हैं। अनुलोम-विलोम तनाव कम कर ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाता है। भ्रामरी प्राणायाम मानसिक शांति देता है, नींद को सुधारता है और मेनोपॉज के लक्षणों में राहत देता है। कपालभाति पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और शरीर को डिटॉक्स करता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महिलाएं रोजाना 30-45 मिनट योग करें। शुरुआत में योग प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में सीखना आवश्यक है, खासकर गर्भावस्था या किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या में। योग और प्राणायाम नियमित रूप से करने से महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ, सुंदर और ऊर्जावान बनी रहती हैं। (With inputs from IANS)

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Topic:

महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योगासन के महत्व और फायदे पर विशेषज्ञों की राय।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.