वाशिंगटन: अमेरिका में मानसिक स्वास्थ्य की परेशानियों के लिए इलाज कराने वालों की संख्या बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा संसाधन और खर्च के बावजूद लोगों की हालत सुधरने की बजाय और बिगड़ रही है।दरअसल, मानसिक स्वास्थ्य पर आयोजित कांग्रेसनल राउंडटेबल में लॉमेकर्स और विशेषज्ञों ने कहा कि सिस्टम की पहुंच और लागत तेजी से बढ़ रही है, फिर भी वह ऐसे ठोस सुधार लाने में जूझ रहा है जिन्हें प्रभावी रूप से मापा जा सके।

कांग्रेसी ग्लेन ग्रोथमैन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सुविधा पाने वाले युवाओं की संख्या दो दशकों में दोगुनी से ज्यादा हो गई है। यह आंकड़ा 2002 में 27 मिलियन था, जो अब बढ़कर 2024 में लगभग 60 मिलियन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा, "तनाव का दर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है और आत्महत्या दर दशकों में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर वापस आ गई है।"

ग्रोथमैन ने कहा, "इससे एक बुनियादी सवाल उठता है। अगर हम पहले से कहीं ज्यादा लोगों का इलाज कर रहे हैं, तो हमें बेहतर नतीजे क्यों नहीं दिख रहे हैं?"

स्वास्थ्य कानून के प्रोफेसर डेविड हाइमन ने कहा कि समस्या इस बात में है कि सिस्टम कैसे बना है। मानसिक स्वास्थ्य और नशीली दवाओं के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों पर खर्च, कुल स्वास्थ्य सुविधा पर खर्च से ज्यादा तेजी से बढ़ा है, जो अब कुल खर्च का लगभग 5 फीसदी है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि ज्यादा खर्च का मतलब जरूरी नहीं कि बेहतर नतीजे हों।

हाइमन ने कहा, "जब हम सर्विस के लिए पैसे देते हैं, तो हमें सेवा मिलती हैं; जरूरी नहीं कि हमें बेहतर मानसिक स्वास्थ्य मिले।" उन्होंने गलत इंसेंटिव और असर के भरोसेमंद तरीकों की कमी की ओर इशारा किया।

उन्होंने धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र को "जालसाजी से भरा उद्योग" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सेवाएं न देने और फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर बिलिंग करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उनके अनुसार, कड़े प्रवर्तन के बावजूद अब तक इसका प्रभाव सीमित रहा है और फिलहाल सिस्टम के दुरुपयोग को रोका नहीं जा सका है।

मनोचिकित्सक सैली सैटेल ने नीति-निर्धारकों को बताया कि इस समस्या का एक प्रमुख कारण 'ओवरडायग्नोसिस' और सामान्य जीवन की परेशानियों का 'मेडिकलाइजेशन' करना है। उन्होंने स्पष्ट किया, "अक्सर डॉक्टर ऐसे लोगों का भी उपचार कर रहे हैं, जिन्हें वास्तव में कोई मानसिक विकार नहीं है। हालांकि, कुछ गंभीर स्थितियां वाकई चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं।"

उन्होंने बच्चों में निदान के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी की ओर ध्यान दिलाया। 2023 में हर 36 में से एक बच्चे में ऑटिज्म पाया गया, जबकि 2006 में यह आंकड़ा 110 में से एक था। बता दें, ऑटिज्म मस्तिष्क के विकास से संबंधित एक न्यूरो-डेवलपमेंटल अवस्था है, जो जन्म से ही शुरू होती है। वहीं, लगभग हर 10 में से एक युवा में एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) की पहचान हो रही है, जहां अक्सर पर्याप्त जांच के बिना ही शुरुआती दौर में दवाओं पर निर्भरता बढ़ जाती है।

सैटेल ने कहा कि बिहेवियरल थेरेपी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा, “बिहेवियरल ट्रीटमेंट आजमाने से पहले दवा लेने की जल्दबाजी आम हो गई है, भले ही ऐसी थेरेपी समय के साथ इस्तेमाल करने पर असरदार हो सकती है।"

उन्होंने दिव्यांगता कार्यक्रम को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं इसमें बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं और कई मामलों में इनकी दोबारा समीक्षा नहीं होती। उन्होंने कहा, “सबसे हानिकारक नतीजों में से एक यह है कि मरीज को कार्यबल से बाहर कर दिया जाता है।” मनोचिकित्सक सैटेल ने काम को सबसे बेहतर थेरेपी में से एक बताया।

इनर कंपास इनिशिएटिव की फाउंडर और पूर्व मरीज लॉरा डेलानो ने लंबे समय तक चलने वाले इलाज और उसके नतीजों के बारे में साफ जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लाखों अमेरिकियों को लंबे समय के खतरों या उन्हें सुरक्षित तरीके से कैसे बंद किया जाए, इस बारे में साफ जानकारी के बिना मनोचिकित्सक दवाएं दी जाती हैं।

उन्होंने कहा, “लगभग दस लाख लोगों ने हमारी जानकारी और संसाधनों तक अपनी पहु़ंच बनाई है। दवा बंद करने की कोशिश करते समय कई लोगों को विड्रॉल सिम्पटम्स से जूझना पड़ता है।”

उन्होंने कहा, “जिसे हम मानसिक स्वास्थ्य संकट कह रहे हैं, वह काफी हद तक ओवरमेडिकलाइजेशन का संकट है।” उन्होंने एक ऐसे सिस्टम के बारे में बताया जो इंसानी मुश्किलों को ऐसी मेडिकल कंडीशन तक कम कर देता है जिनके लिए दवा से इलाज की जरूरत होती है।

इसके साथ ही, आत्महत्या की दर और बताई गई मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियां बढ़ गई हैं। खासकर युवाओं में ये मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं, जिससे इस बात की नए सिरे से जांच हो रही है कि देखभाल कैसे दी जाती है और क्या मौजूदा तरीके परेशानी पैदा करने वाले सामाजिक, व्यवहारिक और आर्थिक कारणों को हल करते हैं। (With inputs from IANS)

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अमेरिका में मानसिक स्वास्थ्य खर्च बढ़ा, नतीजे फिर भी कमज़ोर।
Khushi Chittoria
Khushi Chittoria

Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.