ज्यादा स्क्रीन टाइम से परेशान? अपनाएं भ्रामरी प्राणायाम

नई दिल्ली: आजकल लोगों का स्क्रीन टाइम उनकी शारीरिक गतिविधियों से कहीं अधिक हो गया है, जिसके कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में दिन की शुरुआत गैजेट्स पर समय बिताने के बजाय कुछ मिनट शांत श्वास अभ्यास से करने पर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।इन्हीं में से एक सरल और प्रभावी प्राणायाम भ्रामरी है, जिसे अंग्रेजी में 'हमिंग बी ब्रीदिंग' कहा जाता है। यह व्यायाम दिमाग को कुछ ही मिनटों में शांत कर देता है और पूरे दिन के लिए सकारात्मक ऊर्जा देता है।
भ्रामरी प्राणायाम का नाम भारत में पाई जाने वाली काले रंग की मधुमक्खी, जिसे भंवरा भी कहते हैं, उसके नाम पर रखा गया है। इस प्राणायाम में सांस छोड़ते समय भंवरे जैसी गूंजती हुई आवाज निकाली जाती है, इसलिए इसे भ्रामरी कहा जाता है।
यह प्राणायाम 'अष्ट कुंभक' के प्राणायामों में पाया जाता है। अष्ट कुंभक का मतलब है प्राणायाम की आठ खास और उन्नत विधियां। इनका वर्णन प्राचीन योग ग्रंथ हठ योग प्रदीपिका में मिलता है। इन सभी प्राणायामों का मुख्य उद्देश्य शरीर की सूक्ष्म ऊर्जा को जागृत करना और सांस लेने की क्षमता को बढ़ाना होता है।
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास को न केवल मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लाभकारी बताया बल्कि, छोटे बच्चों और बड़ों के लिए बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
मंत्रालय के अनुसार, 'भ्रामरी' शब्द 'भ्रमर' से लिया गया है। इस प्राणायाम में निकलने वाली ध्वनि भंवरे के गुंजन जैसी होती है, इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहा जाता है। यह शांतिकारक प्राणायाम तनाव, चिंता, क्रोध और मानसिक अतिसक्रियता को कम करने में बेहद प्रभावी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भंवरे जैसी ध्वनि का प्रतिध्वनिक प्रभाव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। यह तनाव संबंधी विकारों जैसे अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर और तनाव को दूर करने में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है और ध्यान की शुरुआत के लिए यह उत्कृष्ट तैयारी प्रदान करता है। (With inputs from IANS)


