गर्मियों में तिल के तेल से अभ्यंग कितना सही? उपयोग से पहले क्या बरतें सावधानी

नई दिल्ली: सर्दियों में शरीर को ठंड से बचाने और गर्माहट बनाए रखने के लिए तिल के तेल से अभ्यंग और उसका सेवन करना आयुर्वेद में बहुत लाभकारी माना जाता है। तिल शरीर को ताकत देता है और हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या गर्मियों में भी तिल के तेल से अभ्यंग करना सही है?
आयुर्वेद में अभ्यंग का अर्थ है पूरे शरीर पर हल्के दबाव से गुनगुने तेल की मालिश करना। तिल के तेल को आयुर्वेद के ग्रंथों में “श्रेष्ठ स्नेह” कहा गया है क्योंकि यह त्वचा की गहराई तक पोषण पहुँचाता है और वात दोष को संतुलित करता है। सर्दियों में यह पूरी तरह लाभकारी होता है, लेकिन गर्मियों में पित्त दोष बढ़ने के कारण इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए।
गर्मियों में भी हफ्ते में दो-तीन बार हल्का गुनगुना तिल का तेल लेकर सुबह खाली पेट मालिश की जा सकती है। इससे रक्त संचार सुधारता है, जोड़ों की सुरक्षा होती है, वात दोष कम होता है, त्वचा को गहराई से पोषण मिलता है और रुखापन कम होता है। साथ ही, यह तनाव घटाने और नींद बेहतर करने में भी मदद करता है। आयुर्वेद में अभ्यंग केवल मालिश नहीं, बल्कि शरीर और मन के संतुलन को बनाए रखने की परंपरागत विधि है।
हालांकि, अभ्यंग करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं। यदि तेज बुखार या संक्रमण हो, त्वचा पर एलर्जी, दाने या जलन हो रही हो, पित्त के कारण त्वचा लाल हो या पाचन संबंधी कोई समस्या हो, तो तिल के तेल से अभ्यंग नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थितियों में अभ्यंग करना स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकता है और संक्रमण या बुखार बढ़ा सकता है।
इस प्रकार, गर्मियों में तिल के तेल से अभ्यंग पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे सही समय, हल्के गुनगुने तेल और सही तरीके से करना ही सुरक्षित और लाभकारी रहता है। (With inputs from IANS)


