नई दिल्ली: आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में करियर और प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने की होड़ के चलते जीवन की मूलभूत जरूरतें अक्सर नजरअंदाज हो रही हैं। सही भोजन और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान कम दिया जा रहा है। लोग शारीरिक फिटनेस के लिए जिम में घंटों पसीना बहाते हैं, लेकिन मानसिक संतुलन की देखभाल भूल जाते हैं।

मन में बनी अशांति धीरे-धीरे तनाव, अनिद्रा और बेचैनी का रूप लेती है, जिसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है और व्यक्ति मानसिक व शारीरिक बीमारियों की चपेट में आ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेडिटेशन मन और मस्तिष्क के लिए संजीवनी का काम कर सकता है, जो भीतर की शांति लौटाने और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है?

ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर की असीम ऊर्जा से जुड़ने का विज्ञान है। दिन में 20 मिनट का मेडिटेशन न केवल मन और मस्तिष्क को ऊर्जा देता है, बल्कि पूरे शरीर में शांति और तरावट भी लाता है। आयुर्वेद में ध्यान को तन और मन के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया है, जबकि विज्ञान इसे मस्तिष्क का ‘री-स्टार्ट बटन’ मानता है। यह अल्फा और थीटा तरंगों के उत्सर्जन के माध्यम से ओवर थिंकिंग यानी ‘ओवरक्लॉकिंग’ को रोकता है।

ध्यान कई तरीकों से तन और मन दोनों के लिए फायदेमंद है। रोजाना 20 मिनट ध्यान करने से तनाव कम होता है और तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर घटता है। यह हैप्पी हार्मोन बढ़ाता है और सकारात्मक सोच और खुश रहने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

इसके अलावा, ध्यान याददाश्त को मजबूत करता है। आजकल बच्चे और बड़े दोनों ही छोटी उम्र से ही भूलने की समस्या से जूझ रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान और बाद में महिलाओं में हार्मोन असंतुलन के कारण याददाश्त कमजोर हो सकती है। ध्यान इस समस्या में मदद करता है और सीखने की क्षमता को बढ़ाता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है, जिससे बीमार होने का खतरा कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

तीसरी लाभकारी बात है गहरी और अच्छी नींद। लगातार काम, फोन और डिजिटल आदतों के कारण नींद प्रभावित होती है। ध्यान मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है, जिससे नींद गहरी और गुणवत्ता वाली होती है। नियमित ध्यान से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होती है और कोशिकाओं की मरम्मत सही ढंग से होती रहती है। (With inputs from IANS)

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20 मिनट का दैनिक ध्यान शरीर और मन को तरोताजा करता है और हार्मोन संतुलन व समग्र स्वास्थ्य में मदद करता है।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.