(नई दिल्ली: मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर हम उतनी गंभीरता से नहीं लेते, जितनी इसकी जरूरत होती है, जबकि इसका सीधा प्रभाव हमारे सोचने-समझने, निर्णय लेने और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। जब मन शांत और संतुलित होता है तो जीवन सरल लगता है, लेकिन तनाव, चिंता या नकारात्मक विचारों की स्थिति में छोटी बातें भी बड़ी लगने लगती हैं।

आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य को बहुत गहराई से समझाया गया है। इसके अनुसार मन सिर्फ विचारों का केंद्र नहीं है, बल्कि यह शरीर और आत्मा के बीच एक सेतु की तरह काम करता है। जब मन संतुलित रहता है, तो शरीर और आत्मा दोनों सही तरीके से काम करते हैं। वहीं, जब मन अस्थिर हो जाता है, तो उसका असर शरीर की सेहत और जीवन की गुणवत्ता दोनों पर पड़ता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता, गुस्सा और अवसाद जैसी समस्याएं बहुत आम हो गई हैं। लोग हर समय किसी न किसी दबाव में रहते हैं कभी काम का, कभी रिश्तों का, तो कभी भविष्य की चिंता का। यही मानसिक असंतुलन धीरे-धीरे शरीर में भी रोग पैदा करने लगता है, जैसे नींद न आना, सिरदर्द, थकान, पाचन की समस्या और यहां तक कि गंभीर बीमारियां भी।

आयुर्वेद के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए सबसे जरूरी दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार है। अगर हम अपने रोजमर्रा के जीवन में थोड़ी नियमितता और अनुशासन लाएं, तो मन काफी हद तक शांत रह सकता है। समय पर सोना, समय पर उठना, संतुलित आहार लेना और शरीर को थोड़ा आराम देना बहुत जरूरी है।

इसके अलावा, आयुर्वेद में ध्यान (मेडिटेशन) और प्राणायाम को मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। जब हम गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाते हैं, तो शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। ध्यान करने से विचारों की भागदौड़ कम होती है और व्यक्ति वर्तमान में जीना सीखता है।

आयुर्वेद यह भी कहता है कि प्रकृति के साथ जुड़ाव मानसिक शांति के लिए बहुत जरूरी है। पेड़-पौधों के बीच समय बिताना, सुबह की ताजी हवा लेना और थोड़ी देर शांत वातावरण में बैठना मन को स्थिर करता है। आज के डिजिटल युग में जब हर तरफ शोर और स्क्रीन टाइम बढ़ गया है, ऐसे में प्रकृति से जुड़ना और भी जरूरी हो गया है।

खान-पान का भी मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या प्रोसेस्ड फूड मन को अस्थिर कर सकता है। आयुर्वेद में सात्त्विक भोजन को बहुत महत्व दिया गया है, जिसमें ताजे फल, सब्जियां, दूध और हल्का भोजन शामिल होता है। ऐसा भोजन मन को शांत और स्थिर रखने में मदद करता है। इसके साथ ही सकारात्मक सोच भी मानसिक स्वास्थ्य का एक बड़ा हिस्सा है। (With inputs from IANS)

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मानसिक स्वास्थ्य जीवन को प्रभावित करता है, जिसे आयुर्वेद से संतुलित किया जा सकता है।
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.