तनाव दूर कर मूड बेहतर करती है 'म्यूजिक थेरेपी', मेंटल हेल्थ के लिए वरदान से कम नहीं संगीत

नई दिल्ली: आधुनिक जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या और बढ़ता काम का दबाव न केवल हमारे शरीर पर बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालता है। तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन, उदासी और घबराहट जैसी मानसिक समस्याएं आजकल आम हो गई हैं। ऐसे समय में म्यूजिक थेरेपी एक सरल, प्रभावी और मुफ्त उपाय के रूप में उभरती है, जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है।
संगीत सुनना या बजाना शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी होता है। दिनभर की भागदौड़ और भावनात्मक तनाव के बाद कुछ देर अपने पसंदीदा हल्के और शांत संगीत को सुनना दिमाग को गहरी शांति और सुकून प्रदान करता है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) भी सलाह देता है कि रोजाना थोड़ा समय खुद के लिए निकालें और अपने पसंदीदा गीत या संगीत के माध्यम से तनाव और चिंता को कम करें।
एनएचएम के अनुसार, संगीत सुनने या बजाने से कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम होता है, जबकि डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे “खुशी के हार्मोन” बढ़ते हैं। इसके परिणामस्वरूप मूड तुरंत बेहतर होता है, चिंता और डिप्रेशन की संभावना कम होती है। संगीत भावनाओं को व्यक्त करने का एक आसान माध्यम भी बनता है, चाहे वह खुशी हो या दुख, यह उन्हें बाहर निकालने में मदद करता है।
म्यूजिक थेरेपी के अन्य लाभ भी हैं। यह मानसिक शांति बढ़ाने, याददाश्त सुधारने, नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाने और जीवन में खुशियों को बढ़ाने में सहायक है। मानसिक तनाव और चिंता में कमी आती है, मूड बेहतर होता है, सकारात्मक सोच बढ़ती है और नकारात्मक विचार कम होते हैं। साथ ही, भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास में सुधार होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना कुछ समय हल्का संगीत सुनना चाहिए, जैसे क्लासिकल, इंस्ट्रुमेंटल, भजन या अपनी पसंद के गाने। यह कोई जटिल थेरेपी नहीं है, बल्कि एक सरल आदत है जो मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाती है। अगर तनाव अधिक हो तो म्यूजिक थेरेपी विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लेना फायदेमंद हो सकता है। साथ ही, तेज़ वॉल्यूम के बजाय कम वॉल्यूम में संगीत सुनें और संभव हो तो हेडफोन या ईयरफोन का उपयोग न करें।
इस तरह, म्यूजिक थेरेपी न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि जीवन में संतुलन, खुशी और सकारात्मकता लाने का प्राकृतिक तरीका भी है। (With inputs from IANS)


