उंगलियां चटकाना सेहत के लिए सही या गलत? जानें क्या कहता है विज्ञान

मुंबई: अक्सर लोग मानते हैं कि बार-बार उंगलियां चटकाने से जोड़ों में दर्द, हड्डियों की कमजोरी और भविष्य में गठिया जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यह विचार लंबे समय से लोगों में प्रचलित है, लेकिन वैज्ञानिक शोध इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानता।
विज्ञान के अनुसार, जब हम उंगलियां मोड़ते या खींचते हैं, तो जोड़ों के बीच मौजूद साइनोवियल फ्लूइड (स्नायु तरल) में हलचल होती है। इसी तरल में बने छोटे गैस के बुलबुले फूटते हैं, जिससे चटकने की आवाज आती है। यह आवाज हड्डियों के टूटने या जोड़ों के खराब होने की नहीं होती।
आयुर्वेद के अनुसार, उंगलियों और जोड़ों का संबंध शरीर में ‘वात दोष’ से होता है। जब वात संतुलित होता है, तो जोड़ों में लचीलापन और ताकत बनी रहती है। कभी-कभी उंगलियां चटकाने से यह दोष नहीं बिगड़ता, खासकर तब जब व्यक्ति स्वस्थ हो। लेकिन अगर वात पहले से असंतुलित है और जोड़ों में दर्द, सूजन या अकड़न मौजूद है, तो उंगलियां चटकाने से समस्या बढ़ सकती है।
सभी लोगों के शरीर एक जैसे नहीं होते। पूरी तरह स्वस्थ लोगों के लिए यह आदत आमतौर पर हानिकारक नहीं है। लेकिन जिन लोगों को गठिया, आर्थराइटिस, हाई यूरिक एसिड, सूजन या हड्डियों की कमजोरी की शिकायत है, उनके लिए यह आदत जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
कई लोग उंगलियां चटकाना तनाव कम करने का तरीका मानते हैं। घबराहट या बेचैनी में यह आदत अनजाने में बन जाती है। विज्ञान के अनुसार, इससे दिमाग को थोड़ी देर के लिए आराम मिल सकता है, लेकिन यह कोई समाधान नहीं है। लगातार तनाव होने पर ध्यान, गहरी सांस और योग जैसी विधियों को अपनाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
इसके अलावा, उंगलियां चटकाने की आदत को नियंत्रित करना भी जरूरी है ताकि यह अनजाने में बार-बार न हो और जोड़ों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। बच्चों में यह आदत अक्सर मानसिक तनाव या बोरियत के कारण विकसित होती है, इसलिए माता-पिता और देखभाल करने वालों को उन्हें सही व्यायाम, खेल और ध्यान अभ्यास के माध्यम से व्यस्त रखना चाहिए। समय के साथ, यह आदत धीरे-धीरे कम की जा सकती है और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से जोड़ों की सुरक्षा बनी रहती है। (With inputs from IANS)


