एक समय था जब भोजन में पाउडर, गोलियां या बोतल में बंद वादे शामिल नहीं होते थे. आज समय बदल गया है. अलमारियां सप्लीमेंट्स से भरी पड़ी हैं जो खान में कमी को पूरा करने का दावा करते हैं. लेकिन कहीं न कहीं, लोग शायद सप्लीमेंट्स को ऑप्शन समझ बैठे हैं. संपूर्ण खाद्य पदार्थ लंबे समय से स्वास्थ्य के लिए जरूरी भूमिका निभाते रहे हैं. वे केवल पोषक तत्व देने के साथ उससे कई ज्यादा काम करते हैं. मुट्ठी भर हरी सब्जियों या एक कटोरी अनाज के भीतर फाइबर, एंजाइम, वसा और प्लांट कंपाउंड का एक जटिल जाल होता है जो सामंजस्य में काम करता है. यह नेचुरल प्रोसेस शरीर प्राप्त भोजन को अवशोषित करने और उपयोग करने के तरीके को निर्धारित करती है.

क्या सप्मीमेंट्स खाना सेहत के लिए नुकसानदायक

न्यूट्रिशन कोर्स, अक्षिता सिंगला, अक्या वेलनेस की को-फाउंडर, कहती हैं कि खाना को सप्लीमेंट्स दोहरा नहीं सकते. यह केवल इस बारे में नहीं है कि आप क्या खाते हैं, बल्कि इस बारे में भी है कि शरीर उन पोषक तत्वों को कैसे लेता करता है और प्रोसेस्ड करता है. खाने में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में बात करते हुए सिंगला कहती हैं, “पत्तेदार सब्जियों से मिलने वाले आयरन जैसी साधारण चीज को ही लें, इसमें विटामिन सी और हेल्पिंग कंपाउंड होते हैं जो इसके एब्जॉप्शन में मदद करते हैं.

खाने का कोई रिप्लेसमेंट नहीं

साबुत अनाज से मिलने वाले प्रोटीन में अमीनो एसिड और वसा संतुलित मात्रा में होते हैं.” वह आगे कहती हैं कि फाइबर, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, आंतों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसकी भरपाई कोई भी कैप्सूल पूरी तरह से नहीं कर सकता. हालांकि, आधुनिक जीवनशैली में सप्लीमेंट्स का सेवन आम होता जा रहा है.

सिंगला बताती हैं, “अनियमित खाने, लंबे कामकाजी घंटे और सुविधा-आधारित आहार ने पारंपरिक खान-पान के तरीकों को बिगाड़ दिया है.” इसके अलावा, मिट्टी की घटती गुणवत्ता के कारण, यहां तक कि परिचित खाने की चीजें भी पहले जैसा पोषण नहीं दे पाते. सिंगला आगे कहती हैं, “भले ही हम अच्छा भोजन करें, तनाव और जीवनशैली के कारक पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं. “यहीं पर सप्लीमेंट्स अपनी भूमिका निभाने लगते हैं, रिपेल्समेंट के रूप में नहीं, बल्कि सहायक के रूप में.”

सप्लीमेंट्स केवल जरूरत के समय इस्तेमाल करें

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, आधुनिक डाइट में भी कई पोषक तत्वों की कमी आम है, खासकर विटामिन डी, आयरन, विटामिन बी12, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फोलेट और आयोडीन. एनआईएच का सुझाव है कि अगर ये कमियां काफी बड़ी है, फिर भी एक विविध, पोषक तत्वों से भरपूर आहार के जरिए से इन्हें काफी हद तक रोका जा सकता है. कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल एक ऑप्शन के रूप में नहीं, बल्कि विशिष्ट कमियों को दूर करने के लिए चुनिंदा रूप से किया जाना चाहिए.

समस्या तब शुरू होती है जब सप्लीमेंट्स को एक आसान उपाय के रूप में देखा जाता है. “एक गोली फाइबर की कमी वाले खाने की भरपाई नहीं कर सकती. प्रोटीन पाउडर पूरे असंतुलन को ठीक नहीं कर सकते और निश्चित रूप से, कोई भी सप्लीमेंट खराब नींद, लगातार तनाव या शारीरिक निष्क्रियता के बुरे असर को खत्म नहीं कर सकता. सिंगला बताती हैं कि यह बढ़ती निर्भरता एक खतरनाक भ्रम पैदा करती है कि सेहत को किसी बोतल के भरोसे छोड़ा जा सकता है.

सप्लीमेंट कभी भी खराब आदतों की भरपाई का जरिया नहीं बनने चाहिए. ये तब सबसे ज़्यादा असरदार होते हैं जब इनका इस्तेमाल सोच-समझकर, असल जरूरतों के आधार पर किया जाए, न कि सिर्फ़ ट्रेंड देखकर. सप्लीमेंट को देखने के आपके नज़रिए में क्या बदलाव लाने की जरूरत है. खाना सिर्फ़ पोषक तत्वों से कहीं बढ़कर है. साबुत अनाज एक पूरा पोषण तंत्र देते हैं, जिसमें फाइबर, एंजाइम और बायोएक्टिव कंपाउंड शामिल होते हैं. सप्लीमेंट जीवनशैली की आदतों को ठीक नहीं कर सकते. कोई भी गोली संतुलित भोजन, पूरी नींद या नियमित कसरत की जगह नहीं ले सकती. सप्लीमेंट को तुरंत ठीक करने वाले उपाय के तौर पर देखने से सेहत में कोई ठोस सुधार होने के बजाय, एक गलत आत्मविश्वास पैदा होता है.”

foodhealthy foodsupplements

Topic:

अलमारियां सप्लीमेंट्स से भरी पड़ी हैं जो खान में कमी को पूरा करने का दावा करते हैं. लेकिन सप्लीमेंट लेना कितना सही है.
Priya Gupta
Priya Gupta

Priya Gupta brings over six years of dynamic journalism experience from leading Indian news agencies, including NDTV, News Nation, and Zee News. TV9 Bharatvarsh A seasoned reporter, she has covered key beats like politics, education, jobs, and international relations, delivering insightful analysis on national and global issues. Priya now drives coverage at health dailogues managing news updates in the health sector. She handles media outreach, develops press releases, spotlights healthcare professionals and institutions, and leads health awareness initiative