नई दिल्ली – भारतीय संस्कृति में योग का महत्व लगातार बढ़ रहा है और लोग इसकी ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में भुजंगीकरण प्राणायाम एक सरल लेकिन प्रभावशाली अभ्यास है, जो शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक असर डालता है।

यह आसन बैठकर किया जाता है और पीठ को मजबूत करने के साथ पाचन प्रणाली को सुधारता है। इसके अलावा, यह तनाव कम करने, भूख बढ़ाने और श्वसन क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगीकरण कमर दर्द, पीठ की समस्याओं, श्वसन विकार और कफ दोष को कम करने के लिए विशेष रूप से अनुशंसित है। यह छाती को खोलता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, ऑक्सीजन ग्रहण में सुधार करता है और थकान व तनाव को दूर कर मन को शांत करता है।

आयुर्वेद के दृष्टिकोण से, यह पित्त दोष को संतुलित करता है और शरीर में ठंडक पहुंचाकर अत्यधिक गर्मी से राहत देता है।

भुजंगीकरण प्राणायाम करने के लिए सुखासन या किसी आरामदायक आसन में बैठें। कमर और गर्दन सीधी रखें, हाथों को घुटनों पर ज्ञान या चिन मुद्रा में रखें और आंखें बंद करें। धीरे-धीरे हवा को पेट में खींचें, मुंह बंद करें, जालंधर बंध लगाएं, सांस अपनी क्षमता अनुसार रोकें और धीरे-धीरे नासिका से छोड़ें। शुरू में इसे 5 बार दोहराएं और धीरे-धीरे 10 बार तक बढ़ाएं।

नियमित अभ्यास से भुजंगीकरण न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत करता है। हालांकि, गर्भवती महिलाएं, गंभीर पीठ दर्द वाले लोग या हाल ही में सर्जरी वाले लोग इसे करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लें। (With inputs from IANS)

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भुजंगीकरण प्राणायाम से पाचन सुधरता है, कफ कम होता है और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.